✨ कृष्ण जन्माष्टमी का धार्मिक महत्व
कृष्ण जन्माष्टमी भगवान विष्णु के अष्टम अवतार श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व है। मथुरा के कारागार में कंस के अत्याचारों से मुक्ति के लिए भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में भगवान का जन्म हुआ। यह दिन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा, व्रत और जागरण करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
📅 जन्माष्टमी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
अष्टमी तिथि प्रारंभ:
4 सितंबर 2026, शाम 06:23 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त:
5 सितंबर 2026, शाम 08:16 बजे
निशिता पूजा मुहूर्त:
रात्रि 11:56 बजे से 12:40 बजे तक
रोहिणी नक्षत्र:
5 सितंबर को रात्रि 09:40 बजे से 6 सितंबर को 10:15 बजे तक
निशिता काल (मध्यरात्रि) को श्रीकृष्ण का जन्म माना जाता है। इसी समय पूजा का विशेष महत्व है।
🪔 श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि
पूजा सामग्री
✅ श्रीकृष्ण प्रतिमा या चित्र✅ पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल)
✅ माखन-मिश्री✅ फूल, तुलसी दल
✅ चंदन, रोली, अक्षत✅ धूप, दीप, नैवेद्य
✅ फल, मेवे, मिष्ठान✅ पीत वस्त्र, आभूषण
विधि
रात को 12 बजे जल मे काला तिल डालकर स्नान करे
तत्पश्चात लड्डू गोपाल या बालकृष्ण मुर्ती की स्थापना करें
अब श्री कृष्ण भगवान की मूर्ती को गंगाजल से स्नान कराये
इसके बाद श्री कृष्ण के प्रतिमा को शहद, माखन, दूध, केसर अर्थात पंचामृत से स्नान कराये
और अंत मे साफ जल या गंगा जल से स्नान कराये।
अब आप भगवान श्री कृष्ण को पालना मे बैठाये
फल, फूल, माला, तुलसी पत्ता, चंदन, गंगाजल, माखन, चंदन, हल्दी कुमकुम आदि को समर्पित करें
अब आप भगवान कृष्ण का पालना गीत गाये – जन्माष्टमी सोहर
भगवान कृष्ण के अलावा गाय की भी पूजा करें
पूजा के अंत मे ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करें
- प्रातः स्नान एवं व्रत संकल्प: सूर्योदय से पूर्व स्नान करें। दिनभर निर्जला या फलाहार व्रत रखने का संकल्प लें।
- शाम को सजावट: पूजा स्थल को फूलों से सजाएँ। झूला या पालना स्थापित करें।
- अभिषेक: श्रीकृष्ण प्रतिमा का पंचामृत एवं शुद्ध जल से अभिषेक करें।
- श्रृंगार एवं पुष्प अर्पण: पीत वस्त्र, मोर मुकुट, फूलों की माला अर्पित करें। तुलसी दल विशेष रूप से चढ़ाएं।
- ध्यान एवं मंत्र जाप: भगवान का ध्यान करें और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें।
- जन्म मुहूर्त पूजा: निशिता काल में भगवान का जन्म महोत्सव मनाएं। आरती करें और भोग लगाएं।
- व्रत पारण: अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत खोलें।
श्री कृष्ण चालीसा
॥ दोहा ॥ बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम। अरुण अधर जनु बिम्बा फल, पिताम्बर शुभ साज॥
दोहा (उत्तरार्ध): जय मनमोहन मदन छवि, कृष्णचन्द्र महाराज। करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥
॥ चौपाई ॥ प्रारंभ: जय यदुनन्दन जय जगवन्दन। जय वसुदेव देवकी नन्दन॥ जय यशुदा सुत नन्द दुलारे। जय प्रभु भक्तन के दृग तारे॥
चौपाई: जय नट-नागर नाग नथैया। कृष्ण कन्हैया धेनु चरैया॥ पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो। आओ दीनन कष्ट निवारो॥
चौपाई: वंशी मधुर अधर धरी तेरी। होवे पूर्ण मनोरथ मेरो॥ आओ हरि पुनि माखन चाखो। आज लाज भारत की राखो॥
चौपाई: गोल कपोल, चिबुक अरुणारे। मृदु मुस्कान मोहिनी डारे॥ रंजित राजिव नयन विशाला। मोर मुकुट वैजयंती माला॥
चौपाई: कुण्डल श्रवण पीतपट आछे। कटि किंकणी काछन काछे॥ नील जलज सुन्दर तनु सोहे। छवि लखि, सुर नर मुनिमन मोहे॥
चौपाई: मस्तक तिलक, अलक घुंघराले। आओ कृष्ण बाँसुरी वाले॥ करि पय पान, पुतनहि तारयो। अका बका कागासुर मारयो॥
चौपाई: मधुवन जलत अग्नि जब ज्वाला। भै शीतल, लखितहिं नन्दलाला॥ सुरपति जब ब्रज चढ़यो रिसाई। मसूर धार वारि वर्षाई॥
चौपाई: लगत-लगत ब्रज चहन बहायो। गोवर्धन नखधारि बचायो॥ लखि यसुदा मन भ्रम अधिकाई। मुख महं चौदह भुवन दिखाई॥
चौपाई: दुष्ट कंस अति उधम मचायो। कोटि कमल जब फूल मंगायो॥ नाथि कालियहिं तब तुम लीन्हें। चरणचिन्ह दै निर्भय किन्हें॥
चौपाई: करि गोपिन संग रास विलासा। सबकी पूरण करी अभिलाषा॥ केतिक महा असुर संहारयो। कंसहि केस पकड़ि दै मारयो॥
चौपाई: मात-पिता की बन्दि छुड़ाई। उग्रसेन कहं राज दिलाई॥ महि से मृतक छहों सुत लायो। मातु देवकी शोक मिटायो॥
चौपाई: भौमासुर मुर दैत्य संहारी। लाये षट दश सहसकुमारी॥ दै भिन्हीं तृण चीर सहारा। जरासिंधु राक्षस कहं मारा॥
चौपाई: असुर बकासुर आदिक मारयो। भक्तन के तब कष्ट निवारियो॥ दीन सुदामा के दुःख टारयो। तंदुल तीन मूंठ मुख डारयो॥
चौपाई: प्रेम के साग विदुर घर मांगे। दुर्योधन के मेवा त्यागे॥ लखि प्रेम की महिमा भारी। ऐसे श्याम दीन हितकारी॥
चौपाई: भारत के पारथ रथ हांके। लिए चक्र कर नहिं बल ताके॥ निज गीता के ज्ञान सुनाये। भक्तन ह्रदय सुधा वर्षाये॥
चौपाई: मीरा थी ऐसी मतवाली। विष पी गई बजाकर ताली॥ राना भेजा सांप पिटारी। शालिग्राम बने बनवारी॥
चौपाई: निज माया तुम विधिहिं दिखायो। उर ते संशय सकल मिटायो॥ तब शत निन्दा करी तत्काला। जीवन मुक्त भयो शिशुपाला॥
चौपाई: जबहिं द्रौपदी टेर लगाई। दीनानाथ लाज अब जाई॥ तुरतहिं वसन बने ननन्दलाला। बढ़े चीर भै अरि मुँह काला॥
चौपाई: अस नाथ के नाथ कन्हैया। डूबत भंवर बचावत नैया॥ सुन्दरदास आस उर धारी। दयादृष्टि कीजै बनवारी॥
चौपाई: नाथ सकल मम कुमति निवारो। क्षमहु बेगि अपराध हमारो॥ खोलो पट अब दर्शन दीजै। बोलो कृष्ण कन्हैया की जै॥
॥ दोहा ॥ (समापन): यह चालीसा कृष्ण का, पाठ करै उर धारि। अष्ट सिद्धि नवनिधि फल, लहै पदारथ चारि॥
📿 जन्माष्टमी व्रत के नियम
✅ करने योग्य
- सात्विक आहार, फलाहार या निर्जला व्रत
- भगवान का कीर्तन और भजन सुनना
- रात्रि जागरण करना
- तुलसी और गाय को भोजन देना
- गरीबों को भोजन एवं वस्त्र दान
❌ न करें
- अनाज का सेवन (व्रत के दौरान)
- प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा
- क्रोध, झूठ, हिंसा
- दिन में सोना
- बाल कटवाना, नाखून काटना
🍛 छप्पन भोग (56 भोग) का महत्व
भगवान श्रीकृष्ण को 56 प्रकार का भोग लगाने की परंपरा है। यह कथा गोवर्धन पर्वत से जुड़ी है, जब भगवान ने 7 दिनों तक गोवर्धन धारण किया और देवताओं ने 8वें दिन 56 भोग अर्पित किए।
• माखन-मिश्री• पंचामृत• दूध-दही
• खीर-पायस• लड्डू (बेसन, मोतीचूर)• पेड़ा
• मेवा मिठाई• फल (विशेषकर केला)• सब्जियाँ (सात्विक)
• पूरी-हलवा• चावल-दाल• पान-सुपारी
आमतौर पर भक्त 56 भोग न होने पर माखन-मिश्री, पंचामृत, फल और मिष्ठान अर्पित करते हैं।
🔱 श्रीकृष्ण मंत्र और महामंत्र
॥ मूल मंत्र ॥
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
॥ महामंत्र (हरे कृष्ण महामंत्र) ॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे
॥ गोपाल मंत्र ॥
ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने
प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः॥
॥Achyutam Keshavam krishn Damodaram ॥
अच्युतं केशवं कृष्ण दामोदरं (भजन) | Achyutam Keshavam Art of Living
मुख्य मंत्र/धुन: अच्युतं केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी वल्लभं
पहली पंक्ति: कौन कहते हैं भगवान आते नहीं, तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं
दूसरी पंक्ति: कौन कहते हैं भगवान खाते नहीं, बेर शबरी के जैसे खिलाते नहीं
तीसरी पंक्ति: कौन कहते हैं भगवान सोते नहीं, मां यशोदा के जैसे सुलाते नहीं
चौथी पंक्ति: कौन कहते हैं भगवान नाचते नहीं, गोपियों की तरह तुम नचाते नहीं
सार: यह भजन ईश्वर की निराकार और सकार दोनों रूपों को दर्शाता है। इसमें बताया गया है कि भगवान तभी प्रकट होते हैं, जब भक्त पूर्ण समर्पण और प्रेम (जैसे मीरा, शबरी, यशोदा और गोपियां) के साथ उन्हें बुलाते हैं।
अंग्रेजी अनुवाद (Transliteration): Achyutam Keshavam Krishna Damodaram, Ram Narayanam Janaki Vallabham
कुंजबिहारी जी की आरती
मुखड़ा: ॥ आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
अंतरा १: गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला। श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।
अंतरा १ (continued): गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली। लतन में ठाढ़े बनमाली; भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चन्द्र सी झलक; ललित छवि श्यामा प्यारी की॥
संगति: श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥ x2
अंतरा २: कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं। गगन सों सुमन रासि बरसै; बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग; अतुल रति गोप कुमारी की॥
संगति: श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥ x2
अंतरा ३: जहां ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा। स्मरन ते होत मोह भंगा; बसी सिव सीस, जटा के बीच, हरै अघ कीच; चरन छवि श्रीबनवारी की॥
संगति: श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥ x2
अंतरा ४: चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू। चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू; हंसत मृदु मंद,चांदनी चंद, कटत भव फंद; टेक सुन दीन भिखारी की॥
समापन: आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥ आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
🥣 दही हांडी उत्सव
जन्माष्टमी के अगले दिन दही हांडी का आयोजन होता है। यह बालकृष्ण की माखन चुराने की लीला का स्मरण है। युवा समूह मानव पिरामिड बनाकर ऊंचाई पर बंधी हांडी को फोड़ते हैं। यह उत्सव टीम भावना, साहस और उत्सव का प्रतीक है। महाराष्ट्र, मथुरा, वृंदावन और गुजरात में इसे विशेष धूमधाम से मनाया जाता है।
❓ सामान्य प्रश्न (FAQs)
प्रश्न: क्या जन्माष्टमी का व्रत निर्जला रखना चाहिए?
यह आपकी शारीरिक क्षमता पर निर्भर करता है। निर्जला व्रत अधिक फलदायी माना गया है, लेकिन यदि स्वास्थ्य ठीक न हो तो फलाहार कर सकते हैं।
प्रश्न: जन्माष्टमी पर क्या नहीं खाना चाहिए?
व्रत के दौरान अनाज, प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा का सेवन वर्जित है। व्रत खोलने के बाद सात्विक भोजन ही करें।
प्रश्न: क्या महिलाएं और लड़कियां जन्माष्टमी व्रत रख सकती हैं?
हाँ, सभी आयु वर्ग के भक्त यह व्रत रख सकते हैं। सुहागन महिलाओं के लिए यह विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
प्रश्न: जन्माष्टमी पर किस रंग के वस्त्र पहनने चाहिए?
पीला, केसरिया या सफेद वस्त्र शुभ माने जाते हैं। भगवान श्रीकृष्ण को पीताम्बर अत्यंत प्रिय है।