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D7 सप्तांश देवता कैलकुलेटर

Saptamsha Deity Finder (क्षार, क्षीर, दधि, घृत, इक्षु, मधु, शुद्ध जल)

वैदिक ज्योतिष में प्रत्येक राशि (30°) को 7 बराबर भागों में बाँटा जाता है। विषम और सम राशियों में देवताओं का क्रम अलग होता है। अपने ग्रह की राशि और डिग्री डालकर जानें कि कौन सा देवता आपकी संतान और सृजनात्मकता को प्रभावित करता है।

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सप्तांश (D7) देवता कैलकुलेटर

D7 चार्ट में प्रत्येक राशि को 7 भागों में बाँटा जाता है (प्रत्येक भाग ≈ 4°17')। विषम राशियों (मेष, मिथुन आदि) और सम राशियों (वृषभ, कर्क आदि) में देवताओं का क्रम अलग होता है। ग्रह की राशि और डिग्री चुनें ताकि सही देवता का पता चल सके।

ग्रह की राशि के अंदर सटीक डिग्री स्थिति दर्ज करें (0.000 से 29.999)

D7 सप्तांश चार्ट: वैदिक सिद्धांत

सप्तांश (D7) चार्ट वैदिक ज्योतिष का एक महत्वपूर्ण विभाजनीय चार्ट है जो संतान, सृजनात्मकता, और वंश से संबंधित है। प्रत्येक राशि (30°) को सात बराबर भागों में विभाजित किया जाता है, जिसमें प्रत्येक भाग 4°17'08.57" (30 ÷ 7) का होता है।

महत्वपूर्ण नियम: विषम राशियों (मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु, कुम्भ) और सम राशियों (वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर, मीन) में देवताओं का क्रम विपरीत होता है। केवल चौथा भाग (घृत/घी) दोनों प्रकार की राशियों में समान रहता है।

क्रम विषम राशि देवता सम राशि देवता डिग्री रेंज स्वभाव/अर्थ
1 क्षार (Kshaara) शुद्ध जल (Shuddha Jala) 0° – 4°17' खारापन/पवित्रता
2 क्षीर (Ksheera) मधु (Madhu) 4°17' – 8°34' दूध/शहद
3 दधि (Dadhi) इक्षु (Ikshu) 8°34' – 12°51' दही/गन्ना
4 घृत (Ghritha) घृत (Ghritha) 12°51' – 17°08' घी (दोनों में समान)
5 इक्षु (Ikshu) दधि (Dadhi) 17°08' – 21°25' गन्ना/दही
6 मधु (Madhu) क्षीर (Ksheera) 21°25' – 25°42' शहद/दूध
7 शुद्ध जल (Shuddha Jala) क्षार (Kshaara) 25°42' – 30° पवित्रता/खारापन

ये सात देवता वास्तव में सात प्राकृतिक पदार्थ हैं जो जीवन के विभिन्न चरणों और गुणों का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह दर्शाता है कि संतान का जन्म और विकास कैसे होगा — क्या वह संघर्ष के माध्यम से शुद्ध होगा (क्षार), पोषण से बढ़ेगा (क्षीर), या आध्यात्मिक शांति प्राप्त करेगा (शुद्ध जल)।

सात देवताओं का विस्तृत विवरण

🌊 1. क्षार (Kshaara) - खारा/क्षार
संघर्ष, शुद्धि, परिवर्तन (Struggle, Purification, Transformation)

क्षार समुद्र के पानी की तरह खारापन और संघर्ष का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि जीवन की कठिनाइयाँ व्यक्ति को शुद्ध और मजबूत बनाती हैं। संतान में यह देवता संघर्ष के बाद महान उपलब्धियाँ दिलाता है।

🥛 2. क्षीर (Ksheera) - दूध
पोषण, ममता, विकास (Nourishment, Motherhood, Growth)

क्षीर माँ के दूध की तरह पोषण और ममता का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि संतान को प्यार और सुरक्षा मिलेगी। बच्चा कोमल, स्नेही और दूसरों की देखभाल करने वाला होगा।

🍶 3. दधि (Dadhi) - दही
परिवर्तन, प्रयास का फल, परिपक्वता (Transformation, Effort's Result, Maturity)

दधि दूध के परिवर्तन से बनता है — यह प्रयास और समय के फल का प्रतीक है। संतान में यह देवता दृढ़ता, परिश्रम और परिपक्वता लाता है। बच्चा चुनौतियों को स्वीकार करके आगे बढ़ेगा।

🕯️ 4. घृत (Ghritha) - घी
शुद्धता, स्पष्टता, ज्ञान, सार (Purity, Clarity, Wisdom, Essence)

घृत दूध का सार है जो यज्ञों में प्रयुक्त होता है। यह आध्यात्मिक शुद्धता और बुद्धिमत्ता का प्रतीक है। संतान में यह देवता विवेक, ज्ञान और आंतरिक प्रकाश लाता है।

🎋 5. इक्षु (Ikshu) - गन्ना
मिठास, मेहनत, आशा (Sweetness, Effort, Hope)

इक्षु (गन्ना) कड़ी मेहनत के बाद मिठास देता है। यह जीवन में कठिन परिश्रम के बाद सफलता का प्रतीक है। संतान में यह देवता आशावाद, लगन और सकारात्मक दृष्टिकोण लाता है।

🍯 6. मधु (Madhu) - शहद
संचय, एकाग्रता, मिठास (Accumulation, Focus, Sweetness)

मधु मधुमक्खियों द्वारा फूलों के रस के संचय से बनता है। यह ज्ञान और अनुभव के संचय का प्रतीक है। संतान में यह देवता एकाग्रता, गहन अध्ययन और जीवन की मिठास लाता है।

💧 7. शुद्ध जल (Shuddha Jala) - शुद्ध पानी
पवित्रता, शांति, मोक्ष (Purity, Peace, Liberation)

शुद्ध जल सभी को शुद्ध करता है और जीवन देता है। यह आंतरिक शांति और आध्यात्मिक मुक्ति का प्रतीक है। संतान में यह देवता शांत स्वभाव, उच्च आदर्श और आध्यात्मिक प्रवृत्ति लाता है।

व्यावहारिक उपयोग और व्याख्या

1. संतान के स्वभाव का विश्लेषण

पांचवें भाव के स्वामी ग्रह का सप्तांश देवता देखें। उदाहरण के लिए, यदि पांचवे भाव का स्वामी मेष राशि में 2° पर है, तो वह क्षार देवता के अंतर्गत आता है — इसका अर्थ है कि संतान जीवन में संघर्ष के माध्यम से शुद्ध होगा और मजबूत बनेगा।

2. गर्भावस्था और प्रसव की जानकारी

सप्तम भाव (गर्भाशय) के ग्रहों के सप्तांश देवता गर्भावस्था की प्रक्रिया को दर्शाते हैं। क्षीर या शुद्ध जल देवता आरामदायक गर्भावस्था का संकेत देते हैं, जबकि क्षार देवता कुछ चुनौतियों का संकेत दे सकता है।

3. सृजनात्मक क्षमता

तीसरे भाव (सृजनात्मकता) के ग्रहों के सप्तांश देवता आपकी रचनात्मक अभिव्यक्ति की प्रकृति बताते हैं। घृत देवता बौद्धिक रचनात्मकता, जबकि मधु देवता कलात्मक सौंदर्य को दर्शाता है।

4. उपाय (Remedies)

  • क्षार देवता: शिवलिंग पर जल अर्पित करें, "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें
  • क्षीर देवता: दूध से बने भोग दें, गौ माता को चारा खिलाएं
  • दधि देवता: दही का दान करें, हनुमान चालीसा का पाठ करें
  • घृत देवता: दीपक में घी जलाएं, गायत्री मंत्र का जाप करें
  • इक्षु देवता: गन्ने का रस दान करें, सूर्य को जल अर्पित करें
  • मधु देवता: शहद का दान करें, लक्ष्मी मंत्र का जाप करें
  • शुद्ध जल देवता: गंगाजल का दान करें, "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें