१०८
ॐ नमः शिवाय
जप
ज्योतिष घर • मंत्र विज्ञान विशेष

महाशिवरात्रि पर १०८ मंत्र जाप

पूर्ण विधि, महत्व एवं आध्यात्मिक लाभों की संपूर्ण मार्गदर्शिका

पंचाक्षरी मंत्र १०८ जाप महत्व चेतना परिवर्तन अनंत लाभ
5
अक्षरों का मंत्र
108
पवित्र संख्या
4
प्रहरों में जाप
आध्यात्मिक लाभ

विषय सूची

त्वरित तथ्य

  • १०८ ब्रह्मांडीय संख्या है
  • १०८ रुद्राक्ष माला के मनके
  • सूर्य की पृथ्वी से दूरी १०८ गुना

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१०८ का रहस्य: क्यों है यह संख्या पवित्र?

वैदिक परंपरा में १०८ संख्या का विशेष महत्व है। यह संख्या केवल एक गणितीय मान नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय सिद्धांतों का प्रतिनिधित्व करती है। महाशिवरात्रि पर १०८ बार मंत्र जाप करने से व्यक्ति ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ पूर्ण संरेखण प्राप्त करता है।

ब्रह्मांडीय संबंध

१०८ पवित्र संख्या जो ब्रह्मांड के विभिन्न आयामों को जोड़ती है।

गणितीय परिपूर्णता

१ x २ x २ x ३ x ३ x ३ = १०८, संख्या का अद्वितीय गुणनखंड।

१०८ के रहस्यमय तथ्य

  • सूर्य का व्यास पृथ्वी से १०८ गुना है
  • सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का १०८ गुना है
  • रुद्राक्ष माला में १०८ मनके होते हैं
  • वैदिक ज्योतिष में २७ नक्षत्र × ४ पाद = १०८

१०८ का पवित्र महत्व: वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण

क्षेत्र १०८ का महत्व विवरण
ज्योतिष २७ नक्षत्र × ४ पाद वैदिक ज्योतिष में २७ नक्षत्रों के प्रत्येक के ४ पाद, कुल १०८
योग १०८ प्राणायाम पूर्ण साधना के लिए १०८ प्राणायाम की संख्या
मंत्र विज्ञान पूर्ण चक्र मंत्र ऊर्जा के पूर्ण चक्र के लिए १०८ जाप
शरीर विज्ञान मर्म स्थान मानव शरीर में १०८ मर्म (ऊर्जा) स्थान
ब्रह्मांड विज्ञान सौर मंडल सूर्य-पृथ्वी संबंध में १०८ का अनुपात

आध्यात्मिक दृष्टि

१०८ संख्या शून्य (०), एक (१), और अनंत (८) का संयोजन है। शून्य ईश्वर का, एक आत्मा का, और अनंत ब्रह्मांड का प्रतीक है।

वैज्ञानिक दृष्टि

शोध बताते हैं कि १०८ बार मंत्र दोहराने से मस्तिष्क में गहरी शांति की स्थिति उत्पन्न होती है और तनाव हार्मोन कम होते हैं।

पंचाक्षरी मंत्र: ॐ नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय

ओम नमः शिवाय

पाँच अक्षरों वाला यह महामंत्र पंचतत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) और पंचकोशों (अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय, आनंदमय) का प्रतिनिधित्व करता है।

ब्रह्मांडीय ध्वनि
पृथ्वी तत्व
मः
जल तत्व
शि
अग्नि तत्व
वाय
वायु+आकाश

१०८ जाप की संपूर्ण विधि: चरण दर चरण मार्गदर्शिका

महाशिवरात्रि पर १०८ जाप की विशेष विधि

पूर्व तैयारी

  • स्नान कर स्वच्छ सफेद वस्त्र धारण करें
  • शिवलिंग या शिव चित्र के सामने पूर्वाभिमुख बैठें
  • रुद्राक्ष माला या जाप माला लें (वैकल्पिक)

जाप प्रक्रिया

  • शांत मन से गहरी सांस लें और शिव का ध्यान करें
  • प्रत्येक मंत्र को स्पष्ट और ध्यानपूर्वक उच्चारित करें
  • मन ही मन या धीमी आवाज में मंत्र जपें

संपूर्णता

  • १०८ जाप पूरे होने पर शिव को धन्यवाद दें
  • कुछ समय मौन बैठकर आंतरिक शांति का अनुभव करें
  • शिव आरती करें और प्रसाद ग्रहण करें

शुभ समय: महाशिवरात्रि की चार प्रहरों में जाप

प्रहर समय मंत्र संख्या विशेष लाभ
प्रथम प्रहर सूर्यास्त - ९:३० PM २७ पापों का नाश, धन लाभ
द्वितीय प्रहर ९:३० PM - १२:०० AM २७ मोक्ष की प्राप्ति
तृतीय प्रहर १२:०० AM - २:३० AM २७ इच्छाओं की पूर्ति
चतुर्थ प्रहर २:३० AM - सूर्योदय २७ सर्वोच्च ज्ञान की प्राप्ति
कुल सम्पूर्ण रात्रि १०८ सम्पूर्ण जीवन परिवर्तन

विशेष सुझाव

महाशिवरात्रि की रात को चार प्रहरों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक प्रहर में २७ बार मंत्र जाप करने से पूरे १०८ जाप पूरे हो जाते हैं। यदि संभव न हो तो किसी भी एक प्रहर में १०८ जाप किए जा सकते हैं।

सर्वाधिक शुभ समय: रात १२ बजे से ३ बजे के बीच (ब्रह्म मुहूर्त)

१०८ मंत्र जाप के आध्यात्मिक एवं भौतिक लाभ

आध्यात्मिक लाभ

चेतना विस्तार

मस्तिष्क की अल्फा थीटा तरंगों में वृद्धि, गहरी आध्यात्मिक अनुभूति

कर्म शुद्धि

पिछले जन्मों के संचित कर्मों का शमन एवं शुद्धिकरण

तृतीय नेत्र जागरण

आज्ञा चक्र का सक्रियण एवं अंतर्दृष्टि में वृद्धि

भौतिक लाभ

स्वास्थ्य सुधार

रक्तचाप सामान्यीकरण, प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूती, तनाव कमी

आर्थिक समृद्धि

व्यवसाय में सफलता, नौकरी में प्रमोशन, वित्तीय स्थिरता

पारिवारिक सद्भाव

पारिवारिक कलह दूरी, प्रेम संबंधों में मधुरता

वैज्ञानिक शोध परिणाम

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के शोध के अनुसार, १०८ बार मंत्र जाप से मस्तिष्क के प्रीफ्रंटल कोर्टेक्स में गतिविधि बढ़ती है, जो निर्णय लेने, एकाग्रता और भावनात्मक नियंत्रण के लिए जिम्मेदार है।

महाशिवरात्रि जाप के विशेष सुझाव

करने योग्य

  • शांत और स्वच्छ वातावरण में बैठकर जाप करें
  • मंत्र का अर्थ स्मरण करते हुए जाप करें
  • जाप के दौरान शिव के विभिन्न रूपों का ध्यान करें
  • जाप के बाद कुछ समय मौन रहकर आंतरिक प्रभाव अनुभव करें

न करने योग्य

  • जल्दबाजी में या बिना ध्यान के मंत्र न दोहराएं
  • मंत्र जाप को केवल संख्या पूरी करने का साधन न बनाएं
  • जाप के दौरान मोबाइल या अन्य विचलित न हों
  • अपूर्ण शुद्धि या नकारात्मक मनःस्थिति में जाप न करें

विशेष प्रयोग: १०८ दिन का अनुष्ठान

यदि संभव हो तो महाशिवरात्रि से प्रारंभ कर १०८ दिन तक प्रतिदिन १०८ बार "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें। इससे जीवन में अद्भुत परिवर्तन आते हैं और शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

निष्कर्ष: १०८ जाप का परिवर्तनकारी प्रभाव

महाशिवरात्रि पर १०८ बार "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि एक शक्तिशाली आध्यात्मिक प्रक्रिया है जो व्यक्ति को शिव चेतना से जोड़ती है। यह संख्या १०८ पूर्णता, ब्रह्मांडीय संरेखण और आध्यात्मिक परिपक्वता का प्रतीक है।

आज ही प्रारंभ करें

इस महाशिवरात्रि पर १०८ मंत्र जाप का संकल्प लें और अपने जीवन में आध्यात्मिक परिवर्तन का अनुभव करें।