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Puja, Homa and the Importance of Sankalpa

	 

सौभाग्य सुंदरी

🪶Rs.2100 - 4100🪶

 

Performing This Puja can confer you with the following benefits: **Remove the negative influence of this Dosha. **Pacify the effects of Ketu and enhance positive thinking. **Help you come out of depression and distorted thinking. **Improvise personal relationship and trust. **Overcome issues of fear and removes negativity from life. **Boost your positive thinking and help you to have an optimistic outlook.


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  • Significance🪶🪶?


    Saubhagya Sundari Vrat Significance: Saubhagya Sundari Vrat is significant for married women. The virtues of performing this puja are equivalent to Karwa Chauth. As per belief, observing the Saubhagya Sundari Vrat brings positivity and good fortune in life. Unmarried girls also keep the Saubhagya Sundari Teej Vrat to get free from Manglik Dosha and adverse planetary positions in their Kundali. Saubhagya Sundari Vrat Rituals: On this day, women get up at sunrise and take a bath. They wear the 16 adornments of married women like mehendi, kumkum, bangles, vermillion and anklet. Married women perform the puja of Lord Shiva and Goddess Parvati. The idols of the God and Goddess are draped in a red cloth and placed on a wooden platform. Diyas are lit in front of the idols and offerings are made to the deities in the form of moli, roli, chawal, supari and pan. The idol of Goddess Parvati is decorated with the 16 adornments. Lord Ganesha is offered the first prayers during the puja. Nine planets and the complete family of Lord Shiva are worshipped during the pja. After the puja, a Brahmin is invited to the house and served food, followed by offering of clothes as ‘dakshina’. Women keep fast on this day. They do not eat or drink during the day. The fast is broken after completing all the puja rituals.


    Importance of सौभाग्य सुंदरी 🪶🪶


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  • 	हिंदू धर्म में सौभाग्य सुंदरी व्रत का काफी अधिक महत्व है। माना जाता है कि इस व्रत को रखने से मांगलिक दोष के साख-साथ विवाह में आ रही अड़चनों से छुटकारा मिल जाता है। जानिए सौभाग्य सुंदरी व्रत का मुहूर्त और पूजा विधि।
    
    सौभाग्य सुंदरी व्रत महत्व:
    सौभाग्य सुंदरी व्रत का पर्व वैवाहिक जीवन में सकारात्मकता और सौभाग्य लाने के लिए रखा जाता है। इसके साथ ही पति और पुत्रों की सुख-समृद्धि के लिए महिलाएं इस व्रत को रखती हैं। माना जाता है कि जो महिला इस व्रत को रखती हैं उसे सुखी और सफल जीवन प्राप्त होता है। इसके साथ ही जिन अविवाहित लड़कियां की कुंडली में विवाह दोष हो, वह भी इस व्रत को करके दोष से मुक्त हो सकती है। जो महिलाएं 'मांगलिक दोष' और कुंडली में प्रतिकूल ग्रहों की स्थिति से पीड़ित हैं वह भी इस व्रत को रखकर समस्याओं से छुटकारा पासकती है। सौभाग्य सुंदरी तीज को महिलाओं के लिए 'अखंड वरदान' के रूप में जाना जाता है।
    
    सौभाग्य सुंदरी व्रत पूजा विधि:
    *सौभाग्य सुंदरी के दिन सूर्योदय के समय उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान करके साफ सुथरे वस्त्र धारण कर लें।
    *अब भगवान शिव और माता पार्वती का मनन करके हुए व्रत का संकल्प लें।
    *एक चौकी में लाल या पीला रंग का वस्त्र बिछाकर माता पार्वती, शिव जी और गणेश जी की तस्वीर या मूर्ति स्थापित कर दें।
    *मां पार्वती को सोलह श्रृंगार अर्पित करें। इसके साथ ही सिंदूर, रोली, फूल, माला, कुमकुम के साथ भोग लगाएं और एक पान में 2 सुपारी, 2 लौंग, 2 हरी इलाचयी, 1 बताशा और 1 रुपए रखकर चढ़ा दें।
    *भगवान शिव को भी सफेद रंग का चंदन, अक्षत, फूल, माला चढ़ाने के साथ भोग लगा दें।
    अंत में घी का दीपक और धूप जलाकर चालीसा, मंत्रों का जाप करें।
    **मां पार्वती के इस मंत्र का जाप करें।
    "ॐ उमाये नमाः
    'देवी देइ उमे गौरी त्राहि मांग करुणानिधे माम् अपरार्धा शानतव्य भक्ति मुक्ति प्रदा भव'
    अंत में आरती करके भूल चूक के लिए माफी मांग लें।
    *दिनभर व्रत रखें। माना जाता है कि इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराने से व्रत का कई गुना अधिक फल मिलता है।
    
    पूजा-विधि?
     सौभाग्य सुंदरी तीज पूजा करते समय भगवान शिव परिवार के साथ नौ ग्रहों की भी पूजा की जाती है। इस दिन भक्त देवी पार्वती को अर्पित करने के लिए एक विशेष भोग तैयार किए जाते हैं। पूजा के पश्चात दान इत्यादि कार्य भी किया जाता है। सौभाग्य सुंदरी तीज के दिन महिलाएं उपवास रखती हैं, सभी पूजा अनुष्ठानों को पूरा करने के बाद व्रत संपन्न होता है। इस व्रत को महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख समृद्धि के लिए करती हैं। अब भोलेनाथ और माता पार्वती की विधि के अनुसार पूजा करें। पूजा करने के बाद भगवान शिव की आरती भी करें। 
    
    महादेव को बेलपत्र, माता पार्वती को सुहाग सामग्री चढ़ाएं :
    यह व्रत पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है। इसलिए पूजा करते समय माता पार्वती को सुहाग की सामग्री, चूड़ियां और चुनरी चढ़ाएं। साथ ही महादेव को धतूरा और बेलपत्र चढ़ाएं। यह व्रत रखने से आपको अखंड सौभग्य की प्राप्ति होगी और शादीशुदा जीवन में चल रहीं परेशानियां दूर होंगी।

    QUICK OVERVIEW🪶🪶


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    आवश्यक सुचना : Vedic Puja ना किसी मंदिर या ट्रस्ट का प्रतिनिधित्व करता है| ना किसी प्रसाद वितरण और निर्माता से जुड़ा हुआ है | हम सिर्फ स्थानीय मंदिर के पुजारियों के द्वारा आपको पूजा की सेवा उपलब्ध कराते है|

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