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शंगचूल महादेव मंदिर – समाज के ठुकराए प्रेमी गजब है! घर वाले ठुकराएं तो यहां आ जाएं, ना दरोगा का डर ना रहने- खाने की फिक्र

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Inspiring Stories from the Vedas - Jyotishgher

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सावधान! गलती से भी इस जगह को आश्रम ना समझना क्योंकि यहां कोई उपकार नहीं किया जाता यहां हर अतिथि का सतकार करने की परंपरा है और उन्हें अतिथि ना समझकर अपने घर का सदस्य मानकर उनकी सेवा करने की समझ रखने वाले लोग हैं। कहते हैं जिनका कोई नहीं होता उनका भगवान होता है, ये बातें अब तक आपने किस्से कहानियों में ही सुनी हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये किस्सा हकीकत है। भारत में एक ऐसी जगह है जहां घर से ठुकराए जाने वाले हर इंसान को आसरा मिलता है। यहां उन्हें ना सिर्फ रहने का बल्कि खाने-पीने का भी सहारा मिलता है। घर से भागे प्रेमी जोड़े को यहां मिलती है शरण: जो प्रेमी जोड़े घर से भागकर विवाह कर लेते हैं। उन्हें यहां शरण मिलती है। जब घर वाले आपके प्यार को ना समझे उसका साथ ना दें दुनिया वाले आपके प्यार पर उंगली उठाएं पुलिस वाले आपको पल-पल सताएं तो आप कहीं पर ना जाएं बस यहीं आ जाएं क्यों यहां आने के बाद आपको घबराने की जरूरत नहीं यहां वो रहते हैं जिनसे हर पुलिस वाला डरता है। यहां की अदालत में पुलिसवालों के हाज़िरी पर बैन हैं। यहां न्याय मांग रहे लोग अपनी पैरवी खुद ही करते हैं और उन्हे डराने धमकाने वाला कोई नहीं होता। ये जगह कहीं और नहीं बल्कि हिमाचल के कुल्लू में ही है। मंदिर के नियम है काफी सख्त: “शंगचूल महादेव” के लोग अपनी विरासत के नियमों का पालन कर रहे हैं । जहां पुलिस के आने पर भी प्रतिबंध लगा हुआ है। “शंगचूल महादेव” के मंदिर में शराब, सिगरेट और चमड़े का सामान किसी प्रकार का हथियार लेकर आना भी मना है। इसके अलावा किसी भी तरह का लड़ाई झगड़ा करना भी मना है यहाँ तक की तेज आवाज में बोलना भी मना है। यहां पांडवों को मिली थी शरण: इतिहास में इस मंदिर के बारे में कई बातें कही गई हैं। यहां आने वाले लोगों को यहां के स्थानीय लोग ये बताते हैं कि यहां पर पांडवों को भी शरण मिली थी। जब पांडव अज्ञातवास पर थे तब वो यहां आ पहुंचे थे। पांडवों को यहां शरण मिली और वो यहां रहने लगे लेकिन उनके बारे में जब कौरवों को पता चला तब वो उनसे बदला लेने के लिए यहां आ पहुंचे लेकिन तब यहां के स्थानीय लोगों ने कौरवों से पांडवों की रक्षा की। कहते हैं कि शंगचुल महादेव के रोद्र रूप को देखकर यहां से कौरव भी लौट गए थे। यहां के लोगों में ऐसी एक जुटता है जिन्होंने यहां से कौरवों को भी लौटने पर मजबूर कर दिया था। तभी से यहां पर ये मान्यता है कि समाज में जो भी ठुकराया जाता है वो यहां आ जाए तो उसे फिर किसी बात की चिंता करने की जरूरत नहीं है। उनकी सुरक्षा से लेकर उनके रहने खाने पीने सभी तरह के बंदोबस्त यहां के स्थानीय लोग उनके लिए कर देते हैं। सबसे बड़ी बात तो ये है कि उन्हें इसके लिए पैसे खर्च करने की भी जरूरत नहीं है। यहां सिर्फ इन्हीं को न्याय करने का हक है: हिमाचल में कुल्लू के पास शांघागांव में शंगचुल महादेव का प्राचीन मंदिर है। वैसे तो इस मंदिर की दूर-दूर तक मान्यता है जिसकी भी शादी में अड़चन और रुकावट आती है वो यहां इनके दर्शन करने पहुंच जाता है। ज्यादातर आपको इस इलाके में प्रेमी जोड़े ही नज़र आएंगें। प्यार करने वाले हर इंसान को यहां पनाह मिलती है। इस मंदिर के 100 बीघा दूर तक किसी भी प्रेमी जोड़े को किसी तरह का कोई खतरा नहीं है। कहते हैं कि घर से ठुकराए लोगों की जिम्मेदारी यहां के देवता करते हैं। एक बार जो शंगचुल महादेव की शरण में आ जाए तो फिर उसे किसी बात की चिंता करने की कोई जरूरत नहीं उनकी हर कठिनाई को वो दूर करते हैं और उनकी आने वाली ज़िंदगी को खुशहाल बना देते हैं।