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गुरु गोचर का मुख्य घटनाक्रम (2026-27)
• कर्क राशि में उच्च गोचर: 2 जून 2026 से गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में रहे हैं (जो 31 अक्टूबर 2026 तक प्रभाव में रहा है)।
• सिंह राशि में प्रवेश: 31 अक्टूबर 2026 को देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में गोचर करेंगे।
• वक्री गति और वापसी: गुरु 13 दिसंबर 2026 को सिंह राशि में वक्री (उल्टी चाल) होंगे और 25 जनवरी 2027 को पुनः कर्क राशि में वापस आ जाएंगे, तथा 26 जून 2027 को फिर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे।
प्रमुख राशियों पर प्रभाव (संक्षिप्त फल)
• मेष राशि: गुरु का गोचर मान-सम्मान, संतान पक्ष और भाग्य में वृद्धि कराएगा। लाभ के अवसर मिलेंगे।
• वृषभ राशि: सुख-सुविधाओं और पारिवारिक जीवन में अनुकूलता रहेगी। अचल संपत्ति या वाहन खरीदने के योग बनेंगे।
• मिथुन राशि: भाग्य का पूरा साथ मिलेगा, इष्ट मित्रों और पितरों की कृपा से अटके हुए कार्य पूरे होंगे तथा नए व्यापारिक संपर्क जुड़ेंगे।
• कर्क राशि: उच्च के गुरु के प्रभाव से ज्ञान, धर्म और आर्थिक उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, साथ ही विवाह और संतान के योग मजबूत होंगे।
• सिंह राशि: स्वयं सिंह राशि में गुरु का आना आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और करियर में नए अवसर लेकर आएगा। हालांकि स्वास्थ्य और खान-पान पर ध्यान देना होगा।
• कन्या राशि: विदेश यात्रा या खर्चों में वृद्धि के साथ आध्यात्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी।
• तुला राशि: आय के नए स्रोत बनेंगे, कौशल का विकास होगा और संतान या प्रेम संबंधों में मजबूती आएगी।
• वृश्चिक राशि: करियर और कार्यक्षेत्र में उन्नति होगी। अधिकारियों और सहकर्मियों का सहयोग प्राप्त होगा।
• धनु राशि: भाग्य में तीव्र चमक आएगी। उच्च शिक्षा और धर्म-कर्म के प्रति झुकाव बढ़ेगा।
• मकर राशि: विपरीत राजयोग जैसा प्रभाव मिलेगा; एक्सपोर्ट-इंपोर्ट या पुराने पारिवारिक विवादों से राहत मिल सकती है।
• कुंभ राशि: साझेदारी और दांपत्य जीवन में सकारात्मक बदलाव आएंगे। कामकाज में विस्तार होगा।
• मीन राशि: शत्रुओं पर विजय मिलेगी और पुराने कर्ज या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से राहत मिल सकती है।