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काला जादू और भूत-प्रेत से रक्षा के लिए खासतौर पर टाइगर आई स्टोन पहना जाता है। ये स्टो्न बुरी नज़र से भी बचाता है और आपके आसपास की नेगेटिव एनर्जी को दूर करता है।
टाइगर आई स्टो न के लाभ
• भूत-प्रेत और जादू-टोने से बचने के लिए आपको टाइगइ आई स्टोएन पहनना चाहिए। इसे पहनने के बाद आपके आसपास कोई प्रेत आत्माे नहीं आ सकती क्यों कि यह आपको बुरी शक्ति्यों से लड़ने की शक्तिक भी देता है।
• यह रत्न उन व्यक्तियों के लिए भी शुभ फल प्रदान करता है । जिनका भाग्य सोया हुआ हो । मेहनत का फल बराबर नही मिल रहा हो , पग-पग पर विभिन्न परेशानियों एवं संघर्षो का सामना कर पड़ रहा हो। जीवन में मृत्यु तुल्य दुःख भोग रहा हो , यश कीर्ति की कमी हो , दुश्मनों से परेशान हो , गरीबी , दरिद्रता जाने का नाम ना ले रही हो ।
• बार-बार वाहन दुर्घटना हो जाती हो तो प्राण प्रतिष्ठित टाइगर स्टोन मंगलवार के दिन धारण करे ।
• यदि आप निरन्तर कर्जे में डूबते जा रहे हो तो शुक्रवार के दिन सिद्ध किया हुआ टाइगर स्टोन गले में लॉकेट के रूप में सफेद धागे में धारण करे ।
• जिन व्यक्तियों को नोकरी में समस्या आ रही या कार्यस्थल में परेशानी हो रही हो तो रविवार को सूर्य की होरा में टाइगर स्टोन धारण करने से लाभ होगा ।
• जिन व्यकितयों के सन्तान होती है मर जाती है या बार - बार आबर्शन हो जाता है तब ऐसी सिथति में दोनो पति-पत्नी बराबर वजन का टाइगर रत्न प्राण प्रतिष्ठा करवा कर शुक्ल पक्ष में जब स्त्री मासिक धर्म में हो तब धारण करे तुरंत लाभ होगा ।
• जिस घर में लड़ाई - झगड़ा अधिक होता हो , सुख शांति न हो , छोटी - छोटी बातों पर क्लेश हो जाता तो उस परिवार का मुखिया टाइगर रत्न सोमवार के दिन चंद्र की होरा में आम के पत्ते के रस का अभिषेक करवा कर धारण करे । टाइगर रत्न सिद्ध व प्राण प्रतिष्टित होना चाहिये ।
• शत्रुओं से परेशान व्यकित मंगलवार के दिन मंगल की होरा में टाइगर स्टोन धारण करे ।
टाइगर आई (बाघमणि) रत्न कस अन्य नाम : इसे बाघमणि, व्याघ्राक्ष, चित्ती, चीता, टाइगर, टाइगर-आइ, दरियाई-लहसुनिया आदि अनेक नामों से जाना जाता है।
जानिए सोया ग्रह/धारण करने का वार/धारण करने की उंगली
• सूर्य ग्रह/रविवार के दिन/अनामिका उंगली में।
• चंद्रमा/सोमवार के दिन/अनामिका उंगली में।
• मंगल ग्रह/मंगलवार के दिन/तर्जनी उंगली में।
• बुध ग्रह/बुधवार के दिन/कनिष्ठा उंगली में।
• गुरु ग्रह/वीरवार के दिन/तर्जनी उंगली में।
• शुक्र ग्रह/शुक्रवार के दिन/गले में धारण करें।
• शनि ग्रह/शनिवार के दिन/मध्यमा उंगली में।
• राहू ग्रह/बुधवार के दिन/दाएं हाथ में।
• केतु ग्रह/बुधवार के दिन/बाएं हाथ में।
धारण विधि:
सामान्य तौर पर रत्न को मंगलवार एवं गुरुवार को गंगाजल एवं कच्चे दूध में डुबोकर सुबह सूर्योदय के बाद धारण करने की सलाह दी जाती है
प्राण प्रतिष्ठा हो जाने पर अंगूठी को प्राप्त कर लेने के पश्चात इसे धारण करने से 24 से 48 घंटे पहले किसी कटोरी में गंगाजल अथवा कच्ची लस्सी में डुबो कर रख दें। कच्चे दूध में आधा हिस्सा पानी मिलाने से आप कच्ची लस्सी बना सकते हैं किन्तु ध्यान रहे कि दूध कच्चा होना चाहिए अर्थात इस दूध को उबाला न गया हो। गंगाजल या कच्चे दूध वाली इस कटोरी को अपने घर के किसी स्वच्छ स्थान पर रखें। उदाहरण के लिए घर में पूजा के लिए बनाया गया स्थान इसे रखने के लिए उत्तम स्थान है। किन्तु घर में पूजा का स्थान न होने की स्थिति में आप इसे अपने अतिथि कक्ष अथवा रसोई घर में किसी उंचे तथा स्वच्छ स्थान पर रख सकते हैं। यहां पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि इस कटोरी को अपने घर के किसी भी शयन कक्ष में बिल्कुल न रखें।
इसके पश्चात इस रत्न को धारण करने के दिन प्रात उठ कर स्नान करने के बाद इसे धारण करना चाहिए। वैसे तो प्रात:काल सूर्योदय से पूर्व का समय रत्न धारण करने के लिए श्रेष्ठ माना जाता है किन्तु आप इसे अपने नियमित स्नान करने के समय पर भी धारण कर सकते हैं। स्नान करने के बाद रत्न वाली कटोरी को अपने सामने रख कर किसी स्वच्छ स्थान पर बैठ जाएं तथा रत्न से संबंधित ग्रह के मूल मंत्र, बीज मंत्र अथवा वेद मंत्र का 108 बार जाप करें।