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॥ माँ जगदम्बे काली आरती ॥

॥ अम्बे तू है जगदम्बे काली ॥

माँ दुर्गा की सबसे शक्तिशाली आरती

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ॥

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॥ जय माँ काली ॥

अम्बे तू है जगदम्बे काली

माँ दुर्गा की सबसे शक्तिशाली आरती

ॐ जय जय जय जगदम्बे काली मैया । जय जय जय जगदम्बे काली ॥

अम्बे तू है जगदम्बे काली आरती माँ दुर्गा की सबसे प्रसिद्ध और शक्तिशाली आरतियों में से एक है। यह आरती माँ के उग्र स्वरूप को समर्पित है, जो भक्तों की रक्षा करती हैं और दुष्टों का संहार करती हैं [citation:3]। नवरात्रि के दिनों में यह आरती विशेष रूप से गाई जाती है। मान्यता है कि इस आरती के नियमित पाठ से माँ जगदम्बे प्रसन्न होती हैं और भक्तों के सभी कष्टों को हर लेती हैं [citation:3]।

॥ अम्बे तू है जगदम्बे काली - पूर्ण आरती ॥

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ॥

हे माँ! तू जगत की माता जगदम्बे काली है, जय हो दुर्गे खप्पर धारण करने वाली। सभी भक्त तेरे ही गुण गाते हैं, हे मैया, हम सब तेरी आरती उतारते हैं [citation:3]।

१.

तेरे भक्त जनों पर, माता, भीड़ पड़ी है भारी ।
दानव दल पर टूट पड़ो, माँ, करके सिंह सवारी ॥

हे माता! तेरे भक्तों पर भारी संकट आ पड़ा है। दानवों की सेना पर सिंह पर सवार होकर टूट पड़ो [citation:1][citation:2]।

२.

सौ-सौ सिंहों से बलशाली, है दस भुजाओं वाली ।
दुष्टों को तू ही ललकारती, दुखियों के दुखड़े निवारती ॥

तू सैकड़ों सिंहों से भी अधिक बलशाली है, दस भुजाओं वाली है। दुष्टों को तू ही ललकारती है और दुखियों के दुखों को दूर करती है [citation:2][citation:6]।

३.

माँ-बेटे का है इस जग में, बड़ा ही निर्मल नाता ।
पूत-कपूत सुने हैं, पर ना माता सुनी कुमाता ॥

इस संसार में माँ-बेटे का रिश्ता बहुत ही निर्मल होता है। हमने कपूत (बुरे बेटे) सुने हैं, पर कभी कुमाता (बुरी माँ) नहीं सुनी [citation:1][citation:2]।

४.

सब पे करुणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली ।
दुखियों के दुखड़े निवारती, नैया भँवर से उबारती ॥

तू सब पर करुणा दिखाने वाली है, अमृत बरसाने वाली है। दुखियों के दुखों को दूर करती है और भक्तों की नैया (जीवन रूपी नाव) को संसार सागर के भँवर से बचाती है [citation:2][citation:4]।

५.

नहीं मांगते धन और दौलत, न चाँदी न सोना ।
हम तो मांगें माँ तेरे मन में, एक छोटा सा कोना ॥

हे माँ! हम तुझसे धन-दौलत नहीं मांगते, न चाँदी-सोना मांगते हैं। हम तो बस तेरे मन में एक छोटा सा कोना मांगते हैं [citation:1][citation:6]।

६.

सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली ।
सतियों के सत को संवारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ॥

तू सबकी बिगड़ी बनाने वाली है, लाज बचाने वाली है। सती-साध्वियों के सतीत्व की रक्षा करने वाली है। हे मैया, हम सब तेरी आरती उतारते हैं [citation:1][citation:5]।

७.

चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली ।
वरद हस्त सर पर रख दो माता, संकट हरने वाली ॥

हे माता! हम पूजा की थाली लेकर तेरे चरणों में खड़े हैं। संकट हरने वाली माँ, अपना वरद हस्त हमारे सिर पर रख दो [citation:6]।

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ॥

॥ इति श्री जगदम्बे काली आरती संपूर्णम् ॥

आरती का भावार्थ

प्रथम पंक्ति: हे माँ! तू जगत की माता जगदम्बे काली है। तू खप्पर धारण करने वाली दुर्गा है। सभी भारतीय (भक्त) तेरे ही गुण गाते हैं। हम सब तेरी आरती उतारते हैं [citation:3]।

दूसरी पंक्ति: हे माता! तेरे भक्तों पर भारी संकट आ पड़ा है। दानवों की सेना पर सिंह पर सवार होकर तू टूट पड़ [citation:1]।

तीसरी पंक्ति: तू सैकड़ों सिंहों से भी अधिक बलशाली है और दस भुजाओं वाली है। दुष्टों को तू ही ललकारती है और दुखियों के दुखों को दूर करती है [citation:2]।

चौथी पंक्ति: माँ-बेटे का रिश्ता सबसे निर्मल होता है। हमने कभी कुमाता (बुरी माँ) नहीं सुनी, केवल कपूत (बुरे बेटे) सुने हैं। यह माँ की महिमा है [citation:1]।

पाँचवीं पंक्ति: हम तुझसे धन-दौलत नहीं मांगते, बस तेरे हृदय में एक छोटा सा स्थान मांगते हैं। तू सबकी बिगड़ी बनाने वाली और लाज बचाने वाली है [citation:6]।

आरती का महत्व

शक्ति का स्तोत्र: यह आरती माँ दुर्गा के उग्र स्वरूप को समर्पित है। 'खप्पर वाली' का अर्थ है खप्पर (खोपड़ी) धारण करने वाली, जो माँ के संहारक स्वरूप का प्रतीक है [citation:3]।

भक्तों की रक्षिका: आरती में माँ से प्रार्थना है कि वे दानवों का संहार करें और भक्तों की रक्षा करें। यह हमें सिखाती है कि सच्चे भक्तों की माँ सदैव रक्षा करती हैं [citation:1]।

निष्काम भक्ति: 'नहीं मांगते धन और दौलत' यह पंक्ति सच्चे भक्तों की निष्काम भक्ति का प्रतीक है। भक्त माँ से केवल उनके हृदय में एक स्थान मांगते हैं [citation:6]।

नवरात्रि में विशेष: नवरात्रि के दिनों में इस आरती का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस आरती के नियमित पाठ से माँ जगदम्बे प्रसन्न होती हैं और भक्तों के सभी कष्टों को हर लेती हैं [citation:3]।

आरती करने की विधि

प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें [citation:3]

माँ काली या दुर्गा की मूर्ति/चित्र के सामने दीपक जलाएं [citation:3]

लाल पुष्प, रोली, चावल और लाल वस्त्र अर्पित करें

पूरे भाव से आरती करें और अंत में प्रदक्षिणा करें