नवरात्रि पूजा का महत्व
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते ॥
नवरात्रि का पर्व माँ दुर्गा को समर्पित है। यह पर्व आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होकर नवमी तक चलता है [citation:2]। इन नौ दिनों में माँ के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। सच्चे मन से की गई आराधना से माँ प्रसन्न होती हैं और भक्तों के सभी कष्ट दूर करती हैं [citation:10]। यहाँ हम घर पर की जाने वाली संपूर्ण नवरात्रि पूजा विधि step-by-step बता रहे हैं।
नवरात्रि पूजा सामग्री (Samagri List)
१ प्रथम दिवस: कलश स्थापना (Ghatasthapana)
नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना की जाती है। इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है [citation:4]।
चरण १: स्थान शुद्धि
घर के पवित्र स्थान (उत्तर-पूर्व दिशा) को गंगाजल से शुद्ध करें और वहाँ लाल कपड़ा बिछाएं [citation:4]।
चरण २: जौ बोना
मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालकर उसमें जौ के बीज बोएं और हल्का पानी डालें। यह उर्वरता और समृद्धि का प्रतीक है [citation:1][citation:9]।
चरण ३: कलश तैयार करें
तांबे या मिट्टी के कलश में जल, गंगाजल, सुपारी, सिक्के, चंदन, फूल, दूर्वा और अक्षत डालें। कलश के मुख पर मौली बांधें और उसमें आम के 5 पत्ते लगाएं [citation:7][citation:9]।
चरण ४: नारियल स्थापना
कलश को ढक्कन से बंद करें। ढक्कन पर चावल रखें। नारियल पर लाल कपड़ा लपेटकर, रोली-अक्षत लगाकर कलश के ऊपर स्थापित करें [citation:9]।
चरण ५: माँ दुर्गा स्थापना
चौकी पर माँ दुर्गा का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें। कलश को मूर्ति के दाईं ओर रखें [citation:9]।
चरण ६: अखंड ज्योत प्रज्वलित करें
घी का दीपक जलाएं जो पूरे 9 दिन जलता रहेगा। दीपक माँ के दाईं ओर रखें [citation:4]। इस मंत्र के साथ दीपक स्थापित करें:
"भो दीप ब्रह्मरूपस्त्वं ह्यन्धकारनिवारक ।
इमां मया कृतां पूजां गृह्णंस्तेज: प्रवर्धय ॥"
चरण ७: संकल्प
हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर 9 दिनों के व्रत और पूजा का संकल्प लें। माँ से अपनी कामना के लिए प्रार्थना करें [citation:10]।
दैनिक पूजा विधि (दिन 2-8)
प्रातः कालीन विधि:
- सूर्योदय से पूर्व उठें, स्नान करें
- स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें [citation:8]
- दीपक जलाएं
- माँ को स्नान कराएं (पंचामृत से)
- वस्त्र/चुनरी अर्पित करें
- रोली, चंदन, अक्षत, पुष्प अर्पित करें
- धूप-दीप दिखाएं
- मंत्र जाप करें
- भोग लगाएं
- आरती करें
सायं कालीन विधि:
- संध्या समय पुनः स्नान करें
- माँ का दूसरा श्रृंगार करें
- दीपक जलाएं
- पुष्प अर्पित करें
- मंत्र जाप करें
- दुर्गा चालीसा या सप्तशती पाठ करें
- भोग लगाएं
- आरती करें
- प्रसाद वितरण करें
॥ नवदुर्गा मंत्र (9 दिनों के लिए) ॥
दिन 1 - माँ शैलपुत्री:
ॐ शां शीं शूं शैलपुत्र्यै स्वाहा [citation:3]
दिन 2 - माँ ब्रह्मचारिणी:
ॐ ब्रां ब्रीं ब्रूं ब्रह्मचारिण्यै नमः [citation:3]
दिन 3 - माँ चन्द्रघण्टा:
ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं चन्द्रघण्टायै स्वाहा [citation:3]
दिन 4 - माँ कूष्माण्डा:
ॐ ह्रीं कूष्माण्डायै जगत्प्रसूत्यै नमः [citation:3]
दिन 5 - माँ स्कन्दमाता:
ॐ ह्रीं स्कन्दमात्र्यै नमः [citation:3]
दिन 6 - माँ कात्यायनी:
ॐ ह्रीं श्रीं कात्यायन्यै स्वाहा [citation:3]
दिन 7 - माँ कालरात्रि:
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः [citation:3]
दिन 8 - माँ महागौरी:
ॐ ह्रीं श्रीं ग्लौं गं गौरी गीं स्वाहा [citation:3]
दिन 9 - माँ सिद्धिदात्री:
ॐ ह्रीं सिद्धिदात्र्यै नमः [citation:3]
॥ प्रमुख दुर्गा मंत्र ॥
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ [citation:2]
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते ॥ [citation:2]
ॐ दुर्गायै नमः [citation:1]
हवन विधि (अष्टमी/नवमी)
नवरात्रि के अंतिम दिन (अष्टमी या नवमी) को हवन करने का विशेष महत्व है [citation:5][citation:6]।
हवन सामग्री:
- गाय का गोबर कंडे
- शुद्ध देसी घी
- हवन सामग्री
- कपूर
- आम की समिधा
- गंगाजल
हवन मुहूर्त 2026:
- अष्टमी: 30 सितंबर 2026
- नवमी: 1 अक्टूबर 2026
- प्रातः काल 6:14 AM - 12:10 PM [citation:6]
हवन विधि:
- हवन कुंड या ईंट के चबूतरे पर कंडे जलाएं [citation:5]
- पांच बार शुद्ध घी की आहुति इन मंत्रों से दें: "ॐ प्रजापतये स्वाहा", "ॐ इन्द्राय स्वाहा", "ॐ अग्नये स्वाहा", "ॐ सोमाय स्वाहा", "ॐ भूः स्वाहा" [citation:5]
- 21 बार गायत्री मंत्र से आहुति दें: "ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात् स्वाहा" [citation:5]
- नवदुर्गा के मंत्रों से 11-11 आहुतियां दें [citation:3]
- अंत में महामृत्युंजय मंत्र से आहुति दें [citation:5]
- हवन के बाद पूर्णाहुति दें
कन्या पूजन विधि (अष्टमी/नवमी)
नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्व है। कन्याओं में माँ का स्वरूप माना जाता है [citation:1]।
विधि:
- 2 से 10 वर्ष की 9 कन्याओं को घर बुलाएं [citation:10]
- कन्याओं के पैर धोएं
- उन्हें लाल चुनरी या वस्त्र भेंट करें
- माथे पर रोली-चंदन का तिलक करें [citation:8]
- कलावा बांधें
- उन्हें भोजन (हलवा-पूरी-चना, फल, मिठाई) कराएं [citation:6]
- भोजन के बाद उन्हें उपहार और दक्षिणा दें [citation:8]
- उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें
मान्यता:
कुमारिका (कन्या) अव्यक्त ऊर्जा का प्रतीक है। उनकी पूजा से अव्यक्त शक्ति जागृत होती है और वातावरण सकारात्मक बनता है [citation:1]।
विसर्जन विधि (दशमी)
दशमी के दिन करें:
- कलश पर रखा नारियल प्रसाद के रूप में ग्रहण करें [citation:9]
- कलश के जल को पूरे घर में छिड़कें [citation:9]
- सिक्के निकालकर अपने खजाने में रखें [citation:9]
- जौ (जमे हुए) को नदी या तालाब में विसर्जित करें [citation:9]
- अखंड ज्योत को विधिवत विसर्जित करें
- देवी के चित्र को पूजा स्थान पर ही रखें [citation:9]
व्रत पारण:
कन्या पूजन के बाद या दशमी के दिन व्रत का पारण करें। सबसे पहले माँ को भोग लगाएं, फिर स्वयं भोजन ग्रहण करें [citation:10]।
क्या करें (Do's)
- रंगोली-अल्पना बनाएं [citation:8]
- आम के पत्तों का वंदनवार बनाएं [citation:8]
- मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं [citation:8]
- परिवार के साथ आरती करें [citation:8]
- भजन-कीर्तन करें, कथा सुनें [citation:8]
- पवित्रता और स्वच्छता बनाए रखें [citation:8]
क्या न करें (Don'ts)
- दिन में न सोएं [citation:8][citation:10]
- किसी की निंदा या अपमान न करें [citation:8]
- बाल-नाखून न कटवाएं [citation:10]
- तामसिक भोजन (लहसुन-प्याज) न करें [citation:10]
- चमड़े की वस्तुओं का उपयोग न करें [citation:10]
- क्रोध और चिंता न करें [citation:8]