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शारदीय नवरात्रि 2026

॥ नवरात्रि पूजा विधि ॥

घर पर करें माँ दुर्गा की संपूर्ण आराधना

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥

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॥ दुर्गा सप्तशती ॥

नवरात्रि पूजा का महत्व

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते ॥

नवरात्रि का पर्व माँ दुर्गा को समर्पित है। यह पर्व आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होकर नवमी तक चलता है [citation:2]। इन नौ दिनों में माँ के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। सच्चे मन से की गई आराधना से माँ प्रसन्न होती हैं और भक्तों के सभी कष्ट दूर करती हैं [citation:10]। यहाँ हम घर पर की जाने वाली संपूर्ण नवरात्रि पूजा विधि step-by-step बता रहे हैं।

नवरात्रि पूजा सामग्री (Samagri List)

माँ दुर्गा की प्रतिमा/चित्र
लाल चुनरी
मिट्टी का कलश
जौ के बीज
मिट्टी का पात्र
गंगाजल
कलावा/मौली
सुपारी
सिक्के
आम के पत्ते
नारियल
लाल कपड़ा
चावल (अक्षत)
रोली/कुमकुम
चंदन
फूल माला
धूप-दीप-अगरबत्ती
कपूर
लौंग-इलायची
पंचमेवा
मौसमी फल
हलवा-पूरी-चना
दुर्गा सप्तशती पुस्तक
घी (अखंड ज्योत के लिए)

प्रथम दिवस: कलश स्थापना (Ghatasthapana)

नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना की जाती है। इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है [citation:4]।

चरण १: स्थान शुद्धि

घर के पवित्र स्थान (उत्तर-पूर्व दिशा) को गंगाजल से शुद्ध करें और वहाँ लाल कपड़ा बिछाएं [citation:4]।

चरण २: जौ बोना

मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालकर उसमें जौ के बीज बोएं और हल्का पानी डालें। यह उर्वरता और समृद्धि का प्रतीक है [citation:1][citation:9]।

चरण ३: कलश तैयार करें

तांबे या मिट्टी के कलश में जल, गंगाजल, सुपारी, सिक्के, चंदन, फूल, दूर्वा और अक्षत डालें। कलश के मुख पर मौली बांधें और उसमें आम के 5 पत्ते लगाएं [citation:7][citation:9]।

चरण ४: नारियल स्थापना

कलश को ढक्कन से बंद करें। ढक्कन पर चावल रखें। नारियल पर लाल कपड़ा लपेटकर, रोली-अक्षत लगाकर कलश के ऊपर स्थापित करें [citation:9]।

चरण ५: माँ दुर्गा स्थापना

चौकी पर माँ दुर्गा का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें। कलश को मूर्ति के दाईं ओर रखें [citation:9]।

चरण ६: अखंड ज्योत प्रज्वलित करें

घी का दीपक जलाएं जो पूरे 9 दिन जलता रहेगा। दीपक माँ के दाईं ओर रखें [citation:4]। इस मंत्र के साथ दीपक स्थापित करें:

"भो दीप ब्रह्मरूपस्त्वं ह्यन्धकारनिवारक ।
इमां मया कृतां पूजां गृह्णंस्तेज: प्रवर्धय ॥"

चरण ७: संकल्प

हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर 9 दिनों के व्रत और पूजा का संकल्प लें। माँ से अपनी कामना के लिए प्रार्थना करें [citation:10]।

दैनिक पूजा विधि (दिन 2-8)

प्रातः कालीन विधि:

  • सूर्योदय से पूर्व उठें, स्नान करें
  • स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  • पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें [citation:8]
  • दीपक जलाएं
  • माँ को स्नान कराएं (पंचामृत से)
  • वस्त्र/चुनरी अर्पित करें
  • रोली, चंदन, अक्षत, पुष्प अर्पित करें
  • धूप-दीप दिखाएं
  • मंत्र जाप करें
  • भोग लगाएं
  • आरती करें

सायं कालीन विधि:

  • संध्या समय पुनः स्नान करें
  • माँ का दूसरा श्रृंगार करें
  • दीपक जलाएं
  • पुष्प अर्पित करें
  • मंत्र जाप करें
  • दुर्गा चालीसा या सप्तशती पाठ करें
  • भोग लगाएं
  • आरती करें
  • प्रसाद वितरण करें

॥ नवदुर्गा मंत्र (9 दिनों के लिए) ॥

दिन 1 - माँ शैलपुत्री:

ॐ शां शीं शूं शैलपुत्र्यै स्वाहा [citation:3]

दिन 2 - माँ ब्रह्मचारिणी:

ॐ ब्रां ब्रीं ब्रूं ब्रह्मचारिण्यै नमः [citation:3]

दिन 3 - माँ चन्द्रघण्टा:

ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं चन्द्रघण्टायै स्वाहा [citation:3]

दिन 4 - माँ कूष्माण्डा:

ॐ ह्रीं कूष्माण्डायै जगत्प्रसूत्यै नमः [citation:3]

दिन 5 - माँ स्कन्दमाता:

ॐ ह्रीं स्कन्दमात्र्यै नमः [citation:3]

दिन 6 - माँ कात्यायनी:

ॐ ह्रीं श्रीं कात्यायन्यै स्वाहा [citation:3]

दिन 7 - माँ कालरात्रि:

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः [citation:3]

दिन 8 - माँ महागौरी:

ॐ ह्रीं श्रीं ग्लौं गं गौरी गीं स्वाहा [citation:3]

दिन 9 - माँ सिद्धिदात्री:

ॐ ह्रीं सिद्धिदात्र्यै नमः [citation:3]

॥ प्रमुख दुर्गा मंत्र ॥

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ [citation:2]

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते ॥ [citation:2]

ॐ दुर्गायै नमः [citation:1]

हवन विधि (अष्टमी/नवमी)

नवरात्रि के अंतिम दिन (अष्टमी या नवमी) को हवन करने का विशेष महत्व है [citation:5][citation:6]।

हवन सामग्री:

  • गाय का गोबर कंडे
  • शुद्ध देसी घी
  • हवन सामग्री
  • कपूर
  • आम की समिधा
  • गंगाजल

हवन मुहूर्त 2026:

  • अष्टमी: 30 सितंबर 2026
  • नवमी: 1 अक्टूबर 2026
  • प्रातः काल 6:14 AM - 12:10 PM [citation:6]

हवन विधि:

  1. हवन कुंड या ईंट के चबूतरे पर कंडे जलाएं [citation:5]
  2. पांच बार शुद्ध घी की आहुति इन मंत्रों से दें: "ॐ प्रजापतये स्वाहा", "ॐ इन्द्राय स्वाहा", "ॐ अग्नये स्वाहा", "ॐ सोमाय स्वाहा", "ॐ भूः स्वाहा" [citation:5]
  3. 21 बार गायत्री मंत्र से आहुति दें: "ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात् स्वाहा" [citation:5]
  4. नवदुर्गा के मंत्रों से 11-11 आहुतियां दें [citation:3]
  5. अंत में महामृत्युंजय मंत्र से आहुति दें [citation:5]
  6. हवन के बाद पूर्णाहुति दें

कन्या पूजन विधि (अष्टमी/नवमी)

नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्व है। कन्याओं में माँ का स्वरूप माना जाता है [citation:1]।

विधि:

  1. 2 से 10 वर्ष की 9 कन्याओं को घर बुलाएं [citation:10]
  2. कन्याओं के पैर धोएं
  3. उन्हें लाल चुनरी या वस्त्र भेंट करें
  4. माथे पर रोली-चंदन का तिलक करें [citation:8]
  5. कलावा बांधें
  6. उन्हें भोजन (हलवा-पूरी-चना, फल, मिठाई) कराएं [citation:6]
  7. भोजन के बाद उन्हें उपहार और दक्षिणा दें [citation:8]
  8. उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें

मान्यता:

कुमारिका (कन्या) अव्यक्त ऊर्जा का प्रतीक है। उनकी पूजा से अव्यक्त शक्ति जागृत होती है और वातावरण सकारात्मक बनता है [citation:1]।

विसर्जन विधि (दशमी)

दशमी के दिन करें:

  • कलश पर रखा नारियल प्रसाद के रूप में ग्रहण करें [citation:9]
  • कलश के जल को पूरे घर में छिड़कें [citation:9]
  • सिक्के निकालकर अपने खजाने में रखें [citation:9]
  • जौ (जमे हुए) को नदी या तालाब में विसर्जित करें [citation:9]
  • अखंड ज्योत को विधिवत विसर्जित करें
  • देवी के चित्र को पूजा स्थान पर ही रखें [citation:9]

व्रत पारण:

कन्या पूजन के बाद या दशमी के दिन व्रत का पारण करें। सबसे पहले माँ को भोग लगाएं, फिर स्वयं भोजन ग्रहण करें [citation:10]।

क्या करें (Do's)

  • रंगोली-अल्पना बनाएं [citation:8]
  • आम के पत्तों का वंदनवार बनाएं [citation:8]
  • मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं [citation:8]
  • परिवार के साथ आरती करें [citation:8]
  • भजन-कीर्तन करें, कथा सुनें [citation:8]
  • पवित्रता और स्वच्छता बनाए रखें [citation:8]

क्या न करें (Don'ts)

  • दिन में न सोएं [citation:8][citation:10]
  • किसी की निंदा या अपमान न करें [citation:8]
  • बाल-नाखून न कटवाएं [citation:10]
  • तामसिक भोजन (लहसुन-प्याज) न करें [citation:10]
  • चमड़े की वस्तुओं का उपयोग न करें [citation:10]
  • क्रोध और चिंता न करें [citation:8]