Jyotishgher.in

Karva Chauth Puja / करवा चौथ व्रत की सम्पूर्ण जानक

Authentic Vedic Rituals Performed by Learned Pandits 🙏✨

⚠️ Patience! We request you to have patience. Puja will be done in real at our premises.
Karva Chauth Puja / करवा चौथ व्रत की सम्पूर्ण जानक

About Karva Chauth Puja / करवा चौथ व्रत की सम्पूर्ण जानक

Karwa Chauth Vrat – कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (करकचतुर्थी) के दिन किये जाने वाला व्रत ही “करवा चौथ व्रत” कहलाता है। हमारे हिन्दू धर्म में यह सौभाग्यवती (सुहागिन) स्त्रियों का एक प्रमुख त्यौहार है। पुराने समय से ही इस दिन सुहागिन स्त्रियाँ सज धज कर नए वस्त्र आदि पहनकर बड़े ही हर्षोल्लास से अपने पति की लंबी आयु के लिए इस व्रत को रखती है और पुरे दिन निराहार रहकर शाम को चंद्रमा को अर्ध्य देकर ही भोजन ग्रहण करती हैं। इस दिन भगवान् शंकर, माता पार्वतीजी, भगवान् कार्तिकेय और गणेशजी का पूजन किया जाता है। यह भारत के मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब का पर्व है हालाकि पंजाब में यह व्रत सूर्योदय से पहले सरगी खाकर शुरू किया जाता है लेकिन सभी जगह ऐसा रिवाज नहीं है। बाकि जगहों पर महिलाएं अपने कुटुंब के पारंपरिक रिवाज अनुसार इस व्रत की शुरुआत करती है। करवा चौथ का व्रत अहोई अष्टमी व्रत व दीपावली से पहले मनाया जाता है। ध्यान दें : यदि ससुर नहीं है तो पूजा हुआ श्रंगार का सामान सास को न दें। ताई सास, चाची सास, जेठानी या फिर बड़ी ननद जो सुहागिन हो उसको दें। यह समान केवल सुहागिन स्त्री को ही दें।

Significance of this Puja

क्या करें इस दिन *पूरा श्रंगार करें। *श्रंगार में बिछुवे जरूर पहने। पैरों में महावर अवश्य लगाएँ। *आज के दिन किनारें पर सिंदूर न लगाएँ बल्कि पूरी मांग निकालकर पीछे तक सिंदूर लगाते हुए पूरी मांग भरें। करवा चौथ के दिन लाल या पीली साड़ी पहनना बड़ा ही शुभ फलदायी माना जाता है। *शाम में समय चाँद को अर्घ्य देकर व करवाचौथ व्रत उजमन की विधि पूर्ण करके ही खुद भोजन ग्रहण करें। क्या न करें इस दिन *जो स्त्री मासिक धर्म से है वह व्रत करें किन्तु पूजन न करें। *इस दिन भूलकर भी शारीरिक सम्बन्ध न बनाएं। ब्रह्मचर्य का पालन अवश्य करें। *यदि आप नहा ली है तो अशुद्ध कार्य न करें। जैसे झाड़ू, पोछा लगाना, साफ़-सफाई आदि। *व्रत के दिन कटाई, बुनाई, सिलाई, कपड़ा काटना, सब्जी काटना आदि काम न करें यदि आपका सिलाई का काम है तो कोशिश करें की इस दिन न करें। बाल न कटवाएं, यदि आपको अपने बाल सही कराने है या आईब्रो बनवानी है तो करवाचौथ *व्रत से एक दिन पहले यह सब करवा लें। इस दिन काली, सफ़ेद साड़ी न पहने।

Method / Vidhi

करवा चौथ व्रत की पूजन विधि – Karwa Chauth Vrat Pujan Vidhi करवा चौथ व्रत की पूजा करने से पहले हम एक करवा लेकर उसमे जल भरकर एक सिक्का और कुछ चावल डाल लेंगे और उसे ढककर करवा चौथ के कैलेंडर या शिव परिवार की तस्वीर के सामने रख देंगे। कथा सुनने से पहले हाथ में कुछ चावल के दाने लेकर ही कथा सुननी प्रारंभ करें। कथा सुनने के पश्चात घर के सभी बड़े-बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर सदा सुहागिन रहने का आशीर्वाद प्राप्त करें। शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर नीचे बताएं हुए तरीके से इस व्रत का उजमन करने के बाद ही स्वयं भोजन ग्रहण कर सकते हैं। करवा चौथ की व्रत कथा – Karwa Chauth Vrat katha चौथ माता की कहानी – बहुत समय पहले की बात है, एक साहूकार के सात बेटे और उनकी एक बहन करवा थी। सभी सातों भाई अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे। यहाँ तक कि वे पहले उसे खाना खिलाते और बाद में स्वयं खाते थे। एक बार उनकी बहन ससुराल से मायके आई हुई थी। शाम को भाई जब अपना व्यापार-व्यवसाय बंद कर घर आए तो देखा उनकी बहन बहुत व्याकुल थी। सभी भाई खाना खाने बैठे और अपनी बहन से भी खाने का आग्रह करने लगे, लेकिन बहन ने बताया कि उसका आज करवा चौथ का निर्जल व्रत है और वह खाना सिर्फ चंद्रमा को देखकर उसे अर्घ्‍य देकर ही खा सकती है। चूँकि चंद्रमा अभी तक नहीं निकला है, इसलिए वह भूख-प्यास से व्याकुल हो उठी है। सबसे छोटे भाई को अपनी बहन की हालत देखी नहीं जाती और वह दूर पीपल के पेड़ पर एक दीपक जलाकर चलनी की ओट में रख देता है। दूर से देखने पर वह ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे चतुर्थी का चाँद उदित हो रहा हो। इसके बाद भाई अपनी बहन को बताता है कि चाँद निकल आया है, तुम उसे अर्घ्य देने के बाद भोजन कर सकती हो। बहन खुशी के मारे सीढ़ियों पर चढ़कर चाँद को देखती है, उसे अर्घ्‍य देकर खाना खाने बैठ जाती है। वह पहला टुकड़ा मुँह में डालती है तो उसे छींक आ जाती है। दूसरा टुकड़ा डालती है तो उसमें बाल निकल आता है और जैसे ही तीसरा टुकड़ा मुँह में डालने की कोशिश करती है तो उसके पति की मृत्यु का समाचार उसे मिलता है। वह बौखला जाती है। उसकी भाभी उसे सच्चाई से अवगत कराती है कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ। करवा चौथ का व्रत गलत तरीके से टूटने के कारण देवता उससे नाराज हो गए हैं और उन्होंने ऐसा किया है। सच्चाई जानने के बाद करवा निश्चय करती है कि वह अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं होने देगी और अपने सतीत्व से उन्हें पुनर्जीवन दिलाकर रहेगी। वह पूरे एक साल तक अपने पति के शव के पास बैठी रहती है। उसकी देखभाल करती है। उसके ऊपर उगने वाली सूईनुमा घास को वह एकत्रित करती जाती है। एक साल बाद फिर करवा चौथ का दिन आता है। उसकी सभी भाभियाँ करवा चौथ का व्रत रखती हैं। जब भाभियाँ उससे आशीर्वाद लेने आती हैं तो वह प्रत्येक भाभी से ‘यम सूई ले लो, पिय सूई दे दो, मुझे भी अपनी जैसी सुहागिन बना दो’ ऐसा आग्रह करती है, लेकिन हर बार भाभी उसे अगली भाभी से आग्रह करने का कह चली जाती है। इस प्रकार जब छठे नंबर की भाभी आती है तो करवा उससे भी यही बात दोहराती है। यह भाभी उसे बताती है कि चूँकि सबसे छोटे भाई की वजह से उसका व्रत टूटा था अतः उसकी पत्नी में ही शक्ति है कि वह तुम्हारे पति को दोबारा जीवित कर सकती है, इसलिए जब वह आए तो तुम उसे पकड़ लेना और जब तक वह तुम्हारे पति को जिंदा न कर दे, उसे नहीं छोड़ना। ऐसा कह के वह चली जाती है। सबसे अंत में छोटी भाभी आती है। करवा उनसे भी सुहागिन बनने का आग्रह करती है, लेकिन वह टालमटोली करने लगती है। इसे देख करवा उन्हें जोर से पकड़ लेती है और अपने सुहाग को जिंदा करने के लिए कहती है। भाभी उससे छुड़ाने के लिए नोचती है, खसोटती है, लेकिन करवा नहीं छोड़ती है। अंत में उसकी तपस्या को देख भाभी पसीज जाती है और अपनी छोटी अँगुली को चीरकर उसमें से अमृत उसके पति के मुँह में डाल देती है। करवा का पति तुरंत श्रीगणेश-श्रीगणेश कहता हुआ उठ बैठता है। इस प्रकार प्रभु कृपा से उसकी छोटी भाभी के माध्यम से करवा को अपना सुहाग वापस मिल जाता है। हे श्री गणेश माँ गौरी जिस प्रकार करवा को चिर सुहागन का वरदान आपसे मिला है, वैसा ही सब सुहागिनों को मिले। करवा चौथ व्रत उजमन * उजमन करने के लिए एक थाली में चिन्नी का करवा, तेरह जगह चार-चार पूड़ी और थोड़ा सा सीरा रखें और जिन लोगों के यहाँ कढ़ी रोटी से पूजे जाते हैं वो लोग कढ़ी और रोटी रखें उसके साथ सासूजी के कपडे और श्रृंगार का सामान और कुछ रुपए रखे और अब सासूजी के चरण छूकर उन्हें दे।

Mantras & Slokas

करवा चौथ व्रत पूजा के मंत्र... * पार्वतीजी का मंत्र - ॐ शिवायै नमः * शिव का मंत्र - ॐ नमः शिवाय * स्वामी कार्तिकेय का मंत्र - ॐ षण्मुखाय नमः' * श्रीगणेश का मंत्र - ॐ गणेशाय नमः * चंद्रमा का पूजन मंत्र - ॐ सोमाय नमः

Puja Fees

Rs.2100 - 4100

Ready to book this Puja?

Email us with your details to begin the process.

✉️ Book via Email Now

Frequently Asked Questions

Do I need to be physically present for online puja?

No, online puja doesn’t require your physical presence. The puja is done in your name and thus has a similar effect.

What details do one need to perform puja?

Personal information like your Full Name, Gotra, current city of residence including state, country, time of birth, statement of Purpose, etc.

From where can I book an online puja?

If you wish to book an online puja, simply email us at jyotishgherastro@gmail.com with the required details.