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About Shani Dev Poja / शनि पूजन
शनि देवता को न्याय का देवता कहा जाता है. ऐसी मान्यता है कि वह सभी के कर्मों का फल देते हैं. कोई भी बुरा काम उनसे छिपा नहीं, शनिदेव हर एक बुरे काम का फल मनुष्य को ज़रूर देते हैं. जो गलती जानकर की गई उसके लिए भी और जो अंजाने में हुई, दोनों ही गलतियों पर शनिदेव अपनी नजर रखते हैं. इसीलिए उनकी पूजा का बहुत महत्व है.
शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या को 'शनिचरी अमावस्या' कहा जाता है। इस दिन का विशेष महत्व बताया गया है, परंतु इस दिन शनिदेव का पूजन विधि-विधान से करना चाहिए। यदि सिद्ध विधि से पूजा की जाए तो अवश्य ही लाभ मिलता है।
Significance of this Puja
शनिदेव- न्याय के देवता
एक आदर्श दंडाधिकारी की नजर में सब बराबर होने चाहिए। यह गुण शनिदेव में भी है। उनके लिए न्याय की वेदी पर पिता से लेकर गुरु तक सभी एक हैं। पिता सूर्यदेव को शनि की दशा के कारण हनुमान जी का ग्रास बनना पड़ा, तो वहीं मां पार्वती का सती होना भी इसी का अंश था। राजा हरिशचन्द्र को उनके दान देने के गुण पर जब अभिमान हुआ तब भी शनिदेव ने उन्हें सजा दी।
शनिदेव की घर पर पूजा
शनिदेव को श्राप है कि जिस किसी को वो सीधी नजरों से देखेंगे, उसका अनिष्ट हो जाएगा। इसलिए वास्तु शास्त्र के अनुसार घर पर शनिदेव की मूर्ति स्थापित नहीं करनी चाहिए। यहां शनिदेव का मूर्त रूप मन में याद कर ही पूजा करना श्रेष्ठ माना गया है। अगर आप शनिदेव की मूर्ति या तस्वीर ले भी आएं तो उसे मंदिर में दान कर देना चाहिए और क्षमा याचना करनी चाहिए।
नीले या काले वस्त्र
घर पर शनिदेव की पूजा सामान्य रूप से ही करनी चाहिए। शनिदेव को वस्त्र नीले या काले रंग के चढ़ाने चाहिए। लेकिन शनिवार के दिन शनिदेव की विशेष पूजा अवश्य करनी चाहिए।
नवग्रह मंदिर
अगर संभव हो तो शनिवार के दिन शनि मंदिर या नवग्रह मंदिर में जाने का प्रयास करें। इसके साथ ही शनिवार के दिन प्रात: काल पीपल के पेड़ पर जल, तेल और दीपक अर्पित करें। यह भी शनि साढ़ेसाती या अन्य योगों से हो रही परेशानी को कम करने का एक आसान तरीका है।
Method / Vidhi
शनिवार की सुबह स्नान आदि नित्य कर्मों से निवृत्त हो जाएं। इसके बाद काले पत्थर से बनी शनिदेव की प्रतिमा के सामने निम्न शनि मंत्र का जप करें।
शनि मंत्र- 'ॐ शं शनैश्चराय नम:।'
इस मंत्र का जप कम से कम 108 बार करें। मंत्र जप के समय शनिदेव को तेल अर्पित करते रहना चाहिए। इसके बाद तेल के दीपक से आरती करें और सुख-समृद्धि की कामना करें।
1. हर शनिवार मंदिर में सरसों के तेल का दीया जलाएं. ध्यान रखें कि यह दीया उनकी मूर्ति के आगे नहीं बल्कि मंदिर में रखी उनकी शिला के सामने जलाएं और रखें.
2. अगर आस-पास शनि मंदिर ना हो तो पीपल के पेड़ के आगे तेल का दीया जलाएं. अगर वो भी ना हो तो सरसों का तेल गरीब को दान करें.
जानें क्यों शनि की पूजा में होता सरसों के तेल का इतना महत्व
3. शनिदेव को तेल के साथ ही तिल, काली उदड़ या कोई काली वस्तु भी भेंट करें.
4. भेंट के बाद शनि मंत्र या फिर शनि चालीसा का जाप करे.
5. शनि पूजा के बाद हनुमान जी की पूजा करें. उनकी मूर्ति पर सिन्दूर लगाएं और केला अर्पित करें.
टिप्पणियां6. शनिदेव की पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप करें: ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:
Mantras & Slokas
शनि मंत्र- 'ॐ शं शनैश्चराय नम:।'
Puja Fees
Rs.2100 - 4100
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