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Sri.Hanuman Chalisha / श्री हनुमान चालीसा

Authentic Vedic Rituals Performed by Learned Pandits 🙏✨

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Sri.Hanuman Chalisha / श्री हनुमान चालीसा

About Sri.Hanuman Chalisha / श्री हनुमान चालीसा

भगवान शिव के एकादश रुद्रावतारों में से एक हैं हनुमानजी। आपका जन्म वैशाख पूर्णिमा को हुआ माना जाता है। इसी दिन हनुमान जयंती मनाई जाती है। शिवार्चन के जैसी सरल साधना विधि है। आवश्यकता के अनुसार मंत्र इत्यादि में परिवर्तन किया जाता है। पूर्णत: सात्विक रहते हुए हनुमानजी का पूजन-भजन करना चाहिए अन्यथा देव कोप भोगना पड़ सकता है। साधारणतया हनुमान प्रतिमा को चोला चढ़ाते हैं। हनुमानजी की कृपा प्राप्त करने के लिए मंगलवार को तथा शनि महाराज की साढ़े साती, अढैया, दशा, अंतरदशा में कष्ट कम करने के लिए शनिवार को चोला चढ़ाया जाता है। साधारणतया मान्यता इन्हीं दिनों की है, लेकिन दूसरे दिनों में रवि, सोम, बुध, गुरु, शुक्र को चढ़ाने का निषेध नहीं है। चोले में चमेली के तेल में सिन्दूर मिलाकर प्रतिमा पर लेपन कर अच्‍छी तरह मलकर, रगड़कर चांदी या सोने का वर्क चढ़ाते हैं। इस प्रक्रिया में कुछ बातें समझने की हैं। पहली बात चोला चढ़ाने में ध्यान रखने की है। अछूते (शुद्ध) वस्त्र धारण करें। दूसरी नख से शिख तक (सृष्टि क्रम) तथा शिख से नख तक संहार क्रम होता है। सृष्टि क्रम यानी पैरों से मस्तक तक चढ़ाने में देवता सौम्य रहते हैं। संहार क्रम से चढ़ाने में देवता उग्र हो जाते हैं। यह चीज श्रीयंत्र साधना में सरलता से समझी जा सकती है। यदि कोई विशेष कामना पूर्ति हो तो पहले संहार क्रम से, जब तक कि कामना पूर्ण न हो जाए, पश्चात सृष्टि क्रम से चोला चढ़ाया जा सकता है। ध्यान रहे, पूर्ण कार्य संकल्पित हो। सात्विक जीवन, मानसिक एवं शारीरिक ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है।

Significance of this Puja

हनुमान जी / Hanuman Ji को बजरंगबली, महावीर जैसे बहुत से नामो से भी पुकारा जाता है । हिन्दू शास्त्रों के अनुसार हनुमान जी का जन्म मंगलवार को हुआ था इस लिए जो लोग पुत्र की कामना करते है वे मंगलवार को हनुमान जी का व्रत रखते है । हनुमान जी / Hanuman Ji का वर्त करने वाले लोगो को उस दिन केवल गेहूँ और गुड़ का खाना हीं खाना चाहिए । हनुमान जी का वर्त को 21 सप्ताह तक किया जाता है जिसे करने से इंसान के सारे दोष मिट जाते है और वह मनुष्य भय से मुक्त हो जाता है । हनुमान उपासना से मनुष्य के सभी कष्ट दूर हो जाते है। मंगलवार एवम शनिवार दोनो ही हनुमान जी की पूजा अर्चना के लिए उत्तम होता है | हिन्दू धार्मिक ग्रंथो के अनुसार हनुमान जी / Hanuman Ji का जन्म चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को हुआ था, इसलिए इस शुभ दिन को लोग हनुमान जयंती के नाम से मानते है। इस शुभ दिन भी हनुमान जी की पूजा / Hanuman Ji Ki Pooja पूरे विधि विधान के साथ की जाती है जो बहुत फल दयाक होती है |

Method / Vidhi

पूजन विधि ( सरलतम विधि ) हनुमानजी का पूजन करते समय सबसे पहले कंबल या ऊन के आसन पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं। इसके पश्चात हाथ में चावल व फूल लें व इस मंत्र से हनुमानजी का ध्यान करें- अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यं। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।। ऊँ हनुमते नम: ध्यानार्थे पुष्पाणि सर्मपयामि।। इसके बाद हाथ में लिया हुआ चावल व फूल हनुमानजी को अर्पित कर दें। आवाह्न- हाथ में फूल लेकर इस मंत्र का उच्चारण करते हुए श्री हनुमानजी का आवाह्न करें एवं उन फूलों को हनुमानजी को अर्पित कर दें। उद्यत्कोट्यर्कसंकाशं जगत्प्रक्षोभकारकम्। श्रीरामड्घ्रिध्याननिष्ठं सुग्रीवप्रमुखार्चितम्।। विन्नासयन्तं नादेन राक्षसान् मारुतिं भजेत्।। ऊँ हनुमते नम: आवाहनार्थे पुष्पाणि समर्पयामि।। आसन- नीचे लिखे मंत्र से हनुमानजी को आसन अर्पित करें (आसन के लिए कमल अथवा गुलाब का फूल अर्पित करें।) अथवा चावल या पत्ते आदि का भी उपयोग हो सकता है | तप्तकांचनवर्णाभं मुक्तामणिविराजितम्। अमलं कमलं दिव्यमासनं प्रतिगृह्यताम्।। इसके बाद इन मंत्रों का उच्चारण करते हुए हनुमानजी के सामने किसी बर्तन अथवा भूमि पर तीन बार जल छोड़ें। ऊँ हनुमते नम:, पाद्यं समर्पयामि।। अध्र्यं समर्पयामि। आचमनीयं समर्पयामि।। इसके बाद हनुमानजी को गंध, सिंदूर, कुंकुम, चावल, फूल व हार अर्पित करें। अब इस मंत्र के साथ हनुमानजी को धूप-दीप दिखाएं- साज्यं च वर्तिसंयुक्तं वह्निना योजितं मया। दीपं गृहाण देवेश त्रैलोक्यतिमिरापहम्।। भक्त्या दीपं प्रयच्छामि देवाय परमात्मने।। त्राहि मां निरयाद् घोराद् दीपज्योतिर्नमोस्तु ते।। ऊँ हनुमते नम:, दीपं दर्शयामि।। इसके बाद केले के पत्ते पर या किसी कटोरी में पान के पत्ते के ऊपर प्रसाद रखें और हनुमानजी को अर्पित कर दें तत्पश्चात ऋतुफल अर्पित करें। (प्रसाद में चूरमा, भीगे हुए चने या गुड़ चढ़ाना उत्तम रहता है।) इसके बाद एक थाली में कर्पूर एवं घी का दीपक जलाकर हनुमानजी की आरती करें। इस प्रकार पूजन करने से हनुमानजी अति प्रसन्न होते हैं तथा साधक की हर मनोकामना पूरी करते हैं। हनुमान जी की आरती आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्टदलन रघुनाथ कला की॥१ जाके बल से गिरिवर काँपै। रोग-दोष जाके निकट न झाँपै॥२ अंजनि पुत्र महा बलदाई। संतन के प्रभु सदा सहाई॥३ दे बीरा रघुनाथ पठाये। लंका जारि सीय सुधि लाये॥४ लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥५ लंका जारि असुर सँहारे। सियारामजी के काज सँवारे॥६ लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आनि सजीवन प्रान उबारे॥७ पैठि पताल तोरि जम-कारे। अहिरावन की भुजा उखारे॥८ बायें भुजा असुर दल मारे। दहिने भुजा संतजन तारे॥९ सुर नर मुनि आरती उतारे। जै जै जै हनुमान उचारे॥१० कंचन थार कपूर लौ छाई। आरति करत अंजना माई॥११ जो हनुमान जी की आरती गावै। बसि बैकुण्ठ परमपद पावै॥१२ ---------------------------------------- दोहा : श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।। बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।। चौपाई : जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।। रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।। महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।। कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा।। हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। कांधे मूंज जनेऊ साजै। संकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बन्दन।। विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।। प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।। सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा।। भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे।। लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।। रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।। सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।। सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।। जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबि कोबिद कहि सके कहां ते।। तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।। तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेस्वर भए सब जग जाना।। जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।। प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।। दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।। राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।। सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना।। आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै।। भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।। नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।। संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।। सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा। और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै।। चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।। साधु-संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।। अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।। राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।। तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम-जनम के दुख बिसरावै।। अन्तकाल रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।। और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।। संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।। जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।। जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई।। जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।। तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।। दोहा : पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

Mantras & Slokas

॥ दोह॥ श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधार। बरनउँ रघुवर बिमल जसु , जो दायक फल चारि॥ बुद्धिहीन तनु जानि के, सुमिरौं पवन कुमार। बल बुद्धि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार ॥

Puja Fees

Rs.2100 - 4100

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