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Satyanarayana Puja / श्री सत्य नारायण पूजा

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Satyanarayana Puja /  श्री सत्य नारायण पूजा

About Satyanarayana Puja / श्री सत्य नारायण पूजा

श्री सत्यनारायण व्रत-पूजनकर्ता पूर्णिमा या संक्रांति के दिन स्नान करके कोरे अथवा धुले हुए शुद्ध वस्त्र पहनें, माथे पर तिलक लगाएँ और शुभ मुहूर्त में पूजन शुरू करें। इस हेतु शुभ आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुँह करके सत्यनारायण भगवान का पूजन करें। इसके पश्चात्‌ सत्यनारायण व्रत कथा का वाचन अथवा श्रवण करें। सत्यनारायण व्रत कथा पुरातनकाल में शौनकादिऋषि नैमिषारण्य स्थित महर्षि सूत के समक्ष सांसारिक सुख, लौकिक कष्टमुक्ति और पारलौकिक सिद्धि का मार्ग जानने की जिज्ञासा में पहुँचे। तब सूत जी ने सत्यनारायण व्रत कथा को इसका सर्वोत्तम मार्ग बताया। यही कथा भगवान विष्णु द्वारा नारद जी को सुनाई गई थी। इस कथा के अनुसार शतानन्द, काष्ठ-विक्रेता भील एवं राजा उल्कामुख आदि को भगवान सत्यनारायण की इस पावन कथा के श्रवण माध्यम से मोक्ष की प्राप्ति हुई। दीन ब्राह्मण शतानन्द, जो भिक्षा मांगकर अपना जीवन यापन करते थे। सत्यनारायण कथा के श्रवण और व्रत के फल से वो इस लोक के सुखों को भोगकर स्वर्ग लोक गए। इसी प्रकार काष्ठ विक्रेता भील गांव-गांव में अपनी लकड़ियाँ बेचकर कमाए हुए धन से सत्यनारायण भगवान का पूजन अर्चन करता था। इसी के परिणामस्वरूप भगवान सत्यनारायण की कृपा से उसके घर में धन- धान्य की वृद्धि हुई और उसके सम्पूर्ण दुखों का निवारण हुआ। राजा उल्कामुख ने भी बंधु-बांधवों सहित सत्यनारायण भगवान का विधि पूर्वक व्रत एवं पूजन किया। उन्हें भी सत्यनारायण भगवान की कृपा से मरने के बाद मोक्ष की प्राप्ति हुई। इसी प्रकार इस कथा को जो भी सच्ची भावना और श्रद्धा से श्रवण करेगा और समस्त बुराइयों को त्यागकर सत्यनारायण भगवान का व्रत संपन्न करेगा, उसके समस्त दुःख दूर होंगे और वह समस्त सांसारिक सुख भोगकर मोक्ष को प्राप्त करेगा।

Significance of this Puja

भारत में प्राचीन समय से सत्यनारायण व्रत कथा एवं पूजन का विशेष महत्व माना जाता रहा है। भगवान विष्णु के सत्य सवरूप की यह कथा कष्ट निवारक और मोक्ष प्रदायिनी है। माना जाता है कि जो भी व्यक्ति सच्ची श्रद्धा एवं भक्ति के साथ यह व्रत करता है, भगवान विष्णु उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं।

Method / Vidhi

पवित्रकरण : बाएँ हाथ में जल लेकर दाहिने हाथ की अनामिका से निम्न मंत्र बोलते हुए अपने ऊपर एवं पूजन सामग्री पर जल छिड़कें- ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा । यः स्मरेत्‌ पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यंतरः शुचिः ॥ पुनः पुण्डरीकाक्षं, पुनः पुण्डरीकाक्षं, पुनः पुण्डरीकाक्षं । आसन : निम्न मंत्र से अपने आसन पर उपरोक्त तरह से जल छिड़कें- ॐ पृथ्वी त्वया घता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता । त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु च आसनम्‌ ॥ ग्रंथि बंधन : यदि यजमान सपत्नीक बैठ रहे हों तो निम्न मंत्र के पाठ से ग्रंथि बंधन या गठजोड़ा करें- ॐ यदाबध्नन दाक्षायणा हिरण्य(गुं)शतानीकाय सुमनस्यमानाः । तन्म आ बन्धामि शत शारदायायुष्यंजरदष्टियर्थासम्‌ ॥ आचमन : इसके बाद दाहिने हाथ में जल लेकर तीन बार आचमन करें व तीन बार कहें- 1. ॐ केशवाय नमः स्वाहा, 2. ॐ नारायणाय नमः स्वाहा,3. माधवाय नमः स्वाहा । यह बोलकर हाथ धो लें- ॐ गोविन्दाय नमः हस्तं प्रक्षालयामि ।

Mantras & Slokas

निम्न मंगल मंत्र बोलें- ॐ स्वस्ति न इंद्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः ।स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्ट्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु ॥ द्यौः शांतिः अंतरिक्षगुं शांतिः पृथिवी शांतिरापः शांतिरोषधयः शांतिः। वनस्पतयः शांतिर्विश्वे देवाः शांतिर्ब्रह्म शांतिः सर्वगुं शांतिः शांतिरेव शांति सा मा शांतिरेधि। यतो यतः समिहसे ततो नो अभयं कुरु । शंन्नः कुरु प्राजाभ्यो अभयं नः पशुभ्यः। सुशांतिर्भवतु ॥ ॐ सिद्धि बुद्धि सहिताय श्री मन्ममहागणाधिपतये नमः ॥ नोट : पूजन शुरू करने के पूर्व पूजन की समस्त सामग्री व्यवस्थित रूप से पूजा-स्थल पर रख लें। पंचामृत में तुलसी की पत्तियाँ मिलाएँ। पंजीरी का प्रसाद बनाएँ। श्री सत्यनारायण भगवान की तस्वीर(फोटो) को एक चौकी पर कोरा लाल वस्त्र बिछाकर उस पर स्थापित करें। चौकी को चारों तरफ से केले के पत्तों(खंबे) से सजाएँ। गणेश एवं अंबिका की मूर्ति के अभाव में दो सुपारियों को धोकर, पृथक-पृथक नाड़ा बाँधकर कुंकु लगाकर गणेशजी के भाव से पाटे पर स्थापित करें व उसके दाहिनी ओर अंबिका के भाव से दूसरी सुपारी स्थापना हेतु रखें। संकल्प : अपने दाहिने हाथ में जल, पुष्प, अक्षत व द्रव्य लेकर श्रीसत्यनारायण भगवान आदि के पूजन का संकल्प करें- ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः श्रीमद्भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य अद्य श्री ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीयेपरार्धे श्री श्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलि-युगे कलि प्रथम चरणे जंबूद्वीपे भरतखंडे भारतवर्ष आर्य्यावर्तेक देशांतर्गत (अमुक) क्षेत्रे/नगरे/ग्रामे (अमुक) संवत्सरे, (अमुक)ऋतौ (अमुक) मासानाममासे (अमुक) मासे (अमुक)तिथौ (अमुक)वासरे (अमुक)नक्षत्रे (अमुक)राशि सर्व गृहेषु यथा यथा राशि स्थितेषु सत्सु एवं गृहगुणगण विशेषण विशिष्ठायां शुभ पुण्यतिथौ(अमुक) गोत्रोत्पन्न(अमुक)नाम ( शर्मा/ वर्मा/ गुप्तो दासोऽहम्‌ अहं) ममअस्मिन कायिक वाचिक मानसिक ज्ञातज्ञात सकल दोष परिहारार्थं श्रुतिस्मृतिपुराणोक्त फल प्राप्त्यर्थं आरोग्यैश्वर्य दीर्घायुः विपुल धन धान्य समृद्धर्थं पुत्र-पौत्रादि अभिवृद्धियर्थं व्यापारे उत्तरोत्तरलाभार्थं सुपुत्र पौत्रादि बान्धवस्य सहित श्रीसत्यनारायण,गणेश-अम्बिका आदि पूजनम्‌ च करिष्ये/ करिष्यामि । श्री अंबिका का ध्यान : नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः । नमः प्रकृत्यै भद्रायै प्रणताः स्मताम्‌ ॥श्रीगणेश अंबिकाभ्यां नमः, ध्यानं समर्पयामि । (श्री गणेश मूर्ति अथवा मूर्ति के रूप में सुपारी पर अक्षत चढ़ाएँ, नमस्कार करें। अब भगवान गणेश-अंबिका का आह्वान करें- ॐ गणानां त्वा गणपति (गुँ) हवामहे प्रियाणां त्वा प्रियपति(गुँ) हवामहे, निधीनां त्वा निधिपति(गुँ) हवामहे व्वसो मम ।आहमजानि गर्भधमात्वमजासि गर्भधम्‌ । ॐ अम्बे अम्बिकेऽम्बालिके न मा नयति कश्चन । ससस्त्यश्चकः सुभद्रिकां काम्पीलवासिनीम्‌ ॥ ॐ भूभुर्वः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, गौरीमावाहयामि, स्थापयामि पूजयामि च । (श्री गणेश व सुपारी पर अक्षत चढ़ाएँ।) प्रतिष्ठा हेतु निम्न मंत्र बोलकर गणेश व सुपारी पर पुनः अक्षत चढ़ाएँ- ॐ मनो जूतिर्जुषतामाज्यस्य बृहस्पतिर्यज्ञमिमं तनोत्वरिष्टं यज्ञ(गुँ) समिमं दधातु। विश्वे देवास इह मादयंतामो(गुँ) प्रतिष्ठ ॥ अस्यै प्राणाः प्रतिष्ठन्तु अस्ये प्राणाः क्षरन्तु च । अस्यै देवत्वमर्चायै मामहेति च कश्चन ॥ गणेश-अम्बिके! सुप्रतिष्ठिते वरदे भवेताम्‌ ।प्रतिष्ठापूर्वकम्‌ आसनार्थे अक्षतान्‌ समर्पयामि गणेशाम्बिकाभ्यां नमः । (आसन के लिए अक्षत समर्पित करें।) अब हाथ में जल लेकर निम्न मंत्र बोलकर जल अर्पित करें- ॐ देवस्य त्वा सवितुः प्रसवेऽश्विनोर्बाहुभ्यां पूष्णो हस्ताभ्याम्‌ । एतानि पाद्य, अर्घ्य, आचमनीय, स्नानीय, पुनराचमनीयानि समर्पयामि गणेशाम्बिकाभ्यां नमः ।(जल चढ़ा दें।) पंचामृत स्नान : (पंचामृत से स्नान कराएँ।) शुद्धोदक स्नानं :शुद्ध जल से स्नान निम्न मंत्र बोलते हुए कराएँ- गंगा च यमुना चैव गोदावरी सरस्वती । नर्मदा सिंधु कावेरी स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम ॥ ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि । (शुद्ध जल से स्नान कराएँ।) अब आचमन हेतु जल दें- शुद्धोदकस्नानान्ते आचमनीयं जलं समर्पयामि। वस्त्र एवं उपवस्त्र : निम्न मंत्र बोलकर वस्त्र व उपवस्त्र अर्पित करें :- शीतवातोष्णसंत्राणं लज्जायां रक्षणं परम्‌ । देहालंकरणं वस्त्रमतः शांति प्रयच्छ मे ॥ ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, वस्त्रं समर्पयामि । (श्री गणेश-अम्बिका को वस्त्र समर्पित करें।) यस्या भावेन शास्त्रोक्तं कर्म किंचिन सिध्यति । उपवस्त्रं प्रयच्छामि सर्वकर्मोपकारकम्‌ ॥ ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, उपवस्त्रं समर्पयामि । (श्री गणेश-अम्बिका को उपवस्त्र समर्पित करें।) आचमन के लिए जल अर्पित करें :- वस्त्र उपवस्त्रान्ते आचमनीयं जलं समर्पयामि ॥

Puja Fees

Rs.2100 - 4100

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Frequently Asked Questions

Do I need to be physically present for online puja?

No, online puja doesn’t require your physical presence. The puja is done in your name and thus has a similar effect.

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