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विश्वकर्मा भगवान कौन है? क्यों की जाती है इनकी पूजा जानिए

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हिन्दू धर्म के अनुसार निर्माण एवं सृजन के देवता भगवान विश्वकर्मा कहलाये जाते हैं। तकनीकी भाषा में इन्हें दुनिया का सबसे पहला इंजीनियर भी कहा जाता है। यमपुरी, सुदामापुरी, शिवमंडलपुरी, वरुणपुरी, पाण्डवपुरी, इन्द्रपुरी, देवताओं के भव्य महल, आलीशान भवन, सिंघासन, शस्त्र और देवताओं के दैनिक उपयोग की वस्तुओं आदि का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने किया था। यमराज का कालदण्ड, श्री हरि का सुदर्शन चक्र, महादेव का त्रिशूल, कर्ण कुण्डल आदि सब भगवान विश्वकर्मा द्वारा बनाएं गए हैं। इसके अलावा पुष्पक विमान श्रीकृष्ण की द्वारिका नगरी सोने की लंका हस्तिनापुर स्वर्गलोक पाताल लोक देव और दानवों के राजमहल प्राचीनतम मंदिर और देवालयों का भी निर्माता विश्वकर्मा देव को ही कहा जाता है। विश्वकर्मा के जन्म से जुडी कथा: पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार संसार की रंचना के आरंभ में भगवान विष्णु क्षीर सागर में प्रकट हुए। विष्णु जी के नाभि-कमल से चतुर्मुखी ब्रह्मा जी दृष्टिगोचर हो रहे थे। ब्रह्मा के पुत्र “धर्म” का विवाह “वस्तु (प्रजापति दक्ष की कन्याओं में से एक)” से हुआ। धर्म के सात पुत्र हुए इनके सातवें पुत्र का नाम “वास्तु” रखा गया, जो शिल्पशास्त्र की कला से परिपूर्ण थे। “वास्तु” और अंगिरसी के विवाह के पश्चात उनका एक पुत्र हुआ जिसका नाम विश्वकर्मा रखा गया, जो अपने पिता की तरह वास्तुकला के अद्वितीय गुरु बने। और उन्हें विश्वकर्मा के नाम से जाना जाने लगा। विश्वकर्मा पूजा की मान्यता: विश्वकर्मा जी की पूजा करने से व्यापार में तरक्की होती है । विश्वकर्मा पूजा करने वाले व्यक्ति के घर धन-धान्य तथा सुख-समृद्धि की कभी कोई कमी नही रहती है। तथा सभी मनोकामना पूरी हो जाती है। इसलिए फैक्ट्री, कल-कारखानों, हार्डवेयर की दुकानों में मशीनों ,औजारों आदि से अपना काम करने वाले लोग विश्वकर्मा पूजा बड़े ही धूमधाम से मनाते है।



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