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प्रेम विवाह – भाग 3

Detail🪶🪶

 

यदि किसी जन्म कुंडली में पाप ग्रहों शनि,मंगल,राहु,केतु अथवा सूर्य का नवम भाव पर प्रभाव पड़ रहा है अथवा नवमेश त्रिक भाव (6,8,12 भाव) में स्थित है तब भी मान्यताओं से हटकर विवाह होता है. यदि किसी की जन्म कुंडली में शुक्र तथा चंद्र पंचम भाव में स्थित है तब भी प्रेम विवाह होने की संभावना बनती है. यदि नेप्च्यून पंचम भाव में स्थित है तब प्रेम प्रसंग अथवा प्रेम विवाह में धोखा मिल सकता है और सिवाय निराशा के कुछ हाथ नहीं लगता है. यदि किसी जन्म कुंडली में द्वादशेश तथा सप्तमेश का परस्पर राशि परिवर्तन हो रहा हो तब एक से अधिक विवाह की संभावना बनती है और साथ ही जीवनसाथी का संबंध विदेश से होता है. यूरेनस यदि सप्तम भाव में स्थित हो या सप्तमेश से संबंध रखता हो तब भी विवाह सामान्य संबंध से हटकर होता है. राहु यदि पंचम भाव में हो तब भी विवाह में मान्यताओं का उल्लंघन देखा जा सकता है. पाश्चात्य ज्योतिष के अनुसार यदि शुक्र चतुर्थ भाव में हो तो वैवाहिक जीवन अशांतिपूर्ण रहता है और अधिकाँशत: तलाक हो जाता है अथवा पति-पत्नी आपसी मनमुटाव से एक दूसरे से दूर-दूर रहते हैं. यदि नवाँश कुंडली में पंचमेश व सप्तमेश के आपसी संबंध बन रहे हों तब भी बेमेल विवाह की संभावना बनती है. यदि इन पर पाप प्रभाव पड़ रहा हो तब विवाह में कुछ असंगत भी हो सकता है. यदि शनि कारकाँश लग्न से सप्तम में स्थित है तब जातक का विवाह अपने से काफी बड़ी आयु वाले से विवाह हो सकता है. यदि किसी जन्म कुंडली में पंचमेश, मंगल व शनि के साथ हों और सप्तमेश कुंडली के दूसरे अथवा एकादश भाव में स्थित हो तब प्रेम विवाह की संभावना बनती है. जन्म कुंडली के नवम भाव को धर्म त्रिकोण, पिता तथा गुरु के लिए देखा जाता है. अगर लग्न अथवा चंद्र से नवम भाव या नवमेश पर पाप प्रभाव पड़ रहा है अथवा नवमेश नीच राशि में स्थित है अथवा बुरे भाव में स्थित है तब ऎसा जातक अपनी धार्मिक व सामाजिक मान्यताओं को तोड़कर और अपने पिता अथवा गुरु की आज्ञा का उल्लंघन कर प्रेम विवाह कर सकता है. पिता की इच्छा के विरुद्ध विवाह करता है. यदि किसी कुंडली में पंचमेश, सप्तमेश तथा नवमेश किसी भी भाव में एक साथ युति कर रहे हों अथवा तीनों में दृष्टि संबंध हो या राशि परिवर्तन हो तब भी प्रेम विवाह की संभावना बनती है. किसी जन्म कुंडली में राहु व शनि, शुक्र के साथ स्थित हों अथवा शुक्र पर राहु व शनि की दृष्टि पड़ रही हो तब जातक वासना के वशीभूत होकर संबंध स्थापित कर सकता है. यदि शुक्र का संबंध कुंडली में लग्न, पंचम अथवा सप्तम भाव से हो रहा है और एकादशेश या एकादश भाव में स्थित ग्रह का पंचम अथवा सप्तम भाव से संबंध बन रहा है तब प्रेम विवाह होता है. यदि जन्म कुंडली में प्रेम विवाह के योग बन रहे हों और नवम भाव, नवमेश तथा बृहस्पति पाप ग्रहों के प्रभाव में हो या नवम भाव पाप कर्तरी में हो तब अन्तर्जातीय विवाह होता है अथवा अन्य धर्म में विवाह होता है. यदि किसी जन्म कुंडली में शुक्र के साथ बुध भी सप्तम भाव में अंशात्मक (degree wise) रुप से समीप हो तब पारंपरिक रुप से विवाह नहीं होता है.



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