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पांच पांडवों ने खाया अपने ही पिता का मांस जाने क्यों?

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एक समय की बात है पांडु को किसी ऋषि ने श्राप दिया था कि अगर वो किसी भी स्त्री से शारीरिक संबंध बनाएगा तो उसकी मृत्यु हो जाएगी। इसी दार से उन्होनें कभी भी कुंती और माद्री से शारिरीक संबंध नही बनाए थे। लेकिन कुन्ती को ऋषि दुर्वासा ने वरदान दिया था की वे किसी भी देवता का आवाहन करके उनसे संतान प्राप्त कर सकतीं हैं। पाण्डु ने कहा की ऐसा हो सकता है तो तुम देवता का आहवाह्न करो फिर कुन्ती ने एक-एक कर कई देवताओं का आवाहन किया। इस प्रकार माद्री ने भी देवताओं का आवाहन किया। तब कुन्ती को तीन और माद्री को दो पुत्र मिले जिनमें युधिष्ठिर सबसे बड़े थे। कुंती के दूसरे पुत्र थे भीम और अर्जुन तथा माद्री के पुत्र थे नकुल व सहदेव। पाण्डु ने करदी भूल : एक दिन पाण्डु और माद्री वन में घूम रहे थे। उस समय पाण्डु अपने पर नियंत्रण न रख सके और माद्री के साथ शारीरिक सम्बंध बनाने को उतावले हो गए। और उनसे बन गए सम्बंध तब ऋषि के श्राप के कारण पाण्डु की मृत्यु हो गई थी। पाण्डु ने मृत्यु से पहले माँगा था वरदान : पांडु खुद चाहते थे कि उनके पुत्र उनका मांस खाएं, क्योंकि उसके पुत्र उनके वीर्य से पैदा नहीं हुए थे। जिसके कारण पांडु का ज्ञान, कौशल उनके पुत्रों में नहीं आ पाया था। इसी कारण उसने अपनी मृत्यु पूर्व ऐसा वरदान मांगा था कि उसके बच्चे उनकी मृत्यु के बाद उसके शरीर का मांस मिल बांट कर खाएं जिससे उसका ज्ञान बच्चों में चले जाए। मान्यता के अनुसार मांस तो पांचो भाइयों ने खाया था पर सबसे ज्यादा हिस्सा सहदेव ने खाया था। यहीं कारण था की सहदेव पांचो भाइयों में सबसे अधिक ज्ञानी था और इससे उसे भविष्य में होने वाली घटनाओ को देखने की शक्ति मिल गई थी। श्री कृष्ण के अलावा सहदेव ही था जिसे भविष्य में होने वाले महाभारत के युद्ध के बारे में सम्पूर्ण बाते पता थी। श्री कृष्ण को डर था की कहीं सहदेव यह सब बाते औरों को न बता दे इसलिए श्री कृष्ण ने सहदेव को श्राप दिया था की की यदि उसने ऐसा किया तो उसकी भी मृत्यु हो जायेगी।



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